छत्तीसगढ़

भाजपा का बिजली बिल में लूट फिर चुनाव जितने के लिए छूट

रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य गठन 2000 में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के द्वारा सिंचाई के विद्युत पम्पों के बिल भुगतान के लिए प्रतिहार्स पावर 60 रू. फ्लेट रेट निर्धारित किया गया था। जिससे 3 हार्सपावर में 180 रूपये और 5 हार्सपावर के कनेक्शन 300 रूपये मासिक विद्युत बिल का भुगतान किसानों के द्वारा किया जाता था। वर्ष 2004 में भाजपा सत्तारूढ़ हुई तब भी उसी अनुपात में चुनावी वर्ष 2008 तक विद्युत बिल की वसूली किया जा रहा था।

लेकिन दोबारा सत्तारूढ़ होते ही भाजपा सरकार के द्वारा फ्लेट रेट को समाप्त कर दिया गया और किसानो के एक सिंचाई पम्प में 3 हार्सपावर के कनेक्शन में 6000 यूनिट एवं 5 हार्सपावर के कनेक्शन में 7500 यूनिट विद्युत खपत की छूट प्रदान कर मीटर रिंडिंग के आधार पर हजारों रूपयें की बिल की वसूली किया जा रहा है। किसानों के एक से अधिक सिंचाई पम्पों पर मीटर रिडिंग के आधार पर प्रतियूनिट 4.25 रूपये की उद्योगों से अधिक दर से (स्टील उद्योग पर प्रतियुनिट 4.00 रू. के दर से) विद्युत बिल की वसूली किया जा रहा है। प्रदेश के 90 प्रतिशत नलकूपो में 3 हार्सपावर के विद्युत पम्प है। लेकिन भू-गर्भ जल श्रोत की कमी से जल उपलब्धता की कमी के कारण एक से अधिक 03 हार्सपावर का विद्युत सिंचाई पम्प किसानांे लगाना पड़ा। जिससे अतिरिक्त नलकूप खनन एवं विद्युत पम्प सेट में हजारों रू. खर्च करना पड़ा। तब किसी प्रकार सिंचाई होती है।

किसान मजदूर संघ छ.ग. एवं अन्य किसान संगठनों के द्वारा पूर्व की भांति किसानों के एक से अधिक सभी सिंचाई विद्युत पम्पों पर फ्लेट रेट लागू करने की मांग भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री एवं विद्युत मंत्री डाॅ. रमन सिंह से अनेकों बार किया गया। लेकिन भाजपा सरकार के द्वारा मीटर रिडिंग के आधार पर ही विद्युत बिल की वसूली किया जाता है। जिससे एक से अधिक सिंचाई पम्पों में प्रतिवर्ष हजारों रू. का विद्युत बिल के भुगतान से किसान बूरी तरह प्रभावित और परेशान हुए और कुछ किसानों ने आत्महत्या भी किया। किसानों को विद्युत बिल में 10 वर्षांे तक लूटने के बाद अब फिर से फ्लेट रेट लागू करने का निर्णय भाजपा सरकार के मंत्रीपरिषद के द्वारा लिया गया है। मंत्रीपरिषद के 13 सदस्यों में 05 गैर कृषक शहरी क्षेत्र के विधायक है।

जिनके आधीन कृषि, पशु एवं कुक्कुट पालन, जल संसाधन और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन जैसे किसानों से संबंधित महत्वपूर्ण विभाग है। इसलिए मंत्रीपरिषद में किसानों के हित में निर्णय नहीं लिये गये। प्रस्तावित फ्लेट रेट में किसानों के एक सिंचाई पम्प पर 3 से 5 प्रतिहार्सपावर पर प्रतिहार्सपावर 100 रू. के दर से 300-500 मासिक और एक से अधिक सिंचाई पम्प पर प्रतिहार्स पावर 200 रू. के दर से 600-1000 मासिक विद्युत का भुगतान करना पड़ेगा। एक से अधिक पम्प का फ्लेट रेट भी दोगूना निर्धारित किया गया है। जिसे किसान हितैषी नहीं कहा जा सकता।

जिस प्रकार विधानसभा 2008 के चुनाव के बाद फ्लेट रेट समाप्त किया गया था। उसी प्रकार लोक सभा चुनाव 2014 के बाद फिर से फ्लेट रेट को समाप्त किया जा सकता है। भाजपा जिस प्रकार 2008 से 2018 तक बोनस भुगतान में किसानों को धोखा देते हए प्रतिक्विंटल धान पर 1360 रू. का भुगतान नहीं किया इसलिए अविश्वनीय भाजपा के उपर किसानों को विश्वास नहीं करना चाहिए और 2018 के चुनाव में पराजित कर सत्त्सा से बाहर किया जाना चाहिए।