मिशन 2019: शाह के 23 सेनापतियों पर जीत की जिम्मेदारी,  छत्तीसगढ़ में अनिल जैन को प्रभार

-मध्यप्रदेश, राजस्थान और यूपी में ज्यादा फोकस

नई दिल्ली/रायपुर:

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बड़े पैमाने पर पार्टी प्रभारियों का फेरबदल किया है। बुधवार को जारी सूची में पार्टी ने कुल 17राज्यों ओर एक केंद्र शासित प्रदेश (चंडीगढ़) के लिए कुल 23 पार्टी प्रभारियों और सह प्रभारियों की नियुक्ति की है। इन 23 लोगों के कंधों पर कुल 329 लोकसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों को जीत दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। छत्तीसगढ़ में भी पार्टी ने अनिल जैन पर भरोसा बरकरार रखा है। इससे पहले भी वो हरियाणा और छत्तीसगढ़ के प्रभारी थे। राज्य में लोकसभा की कुल 11 सीटें हैं जिनमें से 10 पर 2014 में भाजपा ने जीत दर्ज की थी। हिमाचल प्रदेश में पार्टी ने नए प्रभारी की नियुक्ति की है।

भाजपा ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश पर विशेष फोकस किया है। एमपी और राजस्थान में दो-दो प्रभारी जबकि यूपी में तीन प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। एमपी में स्वतंत्र सिंह देव और सतीश उपाध्याय को जिम्मेदारी दी गई है तो राजस्थान में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के अलावा राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी को भी तैनात किया गया है। राजस्थान और एमपी में हाल ही में पार्टी को विधान सभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था लेकिन पार्टी ने लोकसभा चुनावों के लिए फिर से कमर कस लिया है।

अमित शाह ने 80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश में तीन प्रभारियों को नियुक्त किया है। गुजरात भाजपा के नेता गोवर्धन झापड़िया के अलावा पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष दुष्यंत गौतम और एमपी के पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्र को यहां प्रभारी बनाया है। गौतम पर करीब 21 फीसदी दलित आबादी को भाजपा की तरफ खींचने की जिम्मेदारी होगी। पार्टी ने दक्षिण में प्रसार के लिए सांसद वी मुरलीधरन के अलावा सुनील देवधर को सह प्रभारी बनाया गया है। देवधर ने त्रिपुरा में पार्टी की जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके काम से खुश होकर पार्टी ने जुलाई में देवधर को राष्ट्रीय सचिव बनाकर तरक्की दी थी। उन्हें तभी आंध्र प्रदेश का सह प्रभारी बनाया था जो अभी भी जारी है। उन्हें 25 लोकसभा सीटों वाले आंध्र प्रदेश में कमल खिलाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। 2014 में वहां से भाजपा को दो सीटें मिली थीं। इसके अलावा वहां विधान सभा चुनाव भी होने हैं।

हरियाणा सरकार में मंत्री कैप्टन अभिमन्यू को चंड़ीगढ़ और पंजाब का प्रभारी बनाया गया है। यहां कुल मिलाकर (पंजाब-13, चंडीगढ़-01) 14 संसदीय सीटें हैं। इनमें से तीन पर 2014 में भाजपा ने जीत दर्ज की थी। बिहार की 40 लोकसभा सीटों के लिए पार्टी ने फिर से भूपेंद्र यादव पर भरोसा किया है। बिहार में एनडीए के सहयोगी रामविलास पासवान को गठबंधन में बनाए रखने के लिए पिछले दिनों भूपेंद्र यादव ने कड़ी मेहनत की थी। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कुशल वक्ता, प्रोफेसर यूपी से विधान पार्षद महेंद्र सिंह को फिर से असम का प्रभारी बनाया है। 2016 के विधान सभा चुनाव में इन्होंने वहां बड़ी भूमिका निभाई थी। अब राजय की 14 संसदीय सीटों पर भाजपा को जीत दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 2014 में असम में भाजपा ने सात सीटों पर जीत हासिल की थी।

गुजरात में पार्टी ने राज्य सभा सांसद और पार्टी महासचिव ओम प्रकाश माथुर पर भरोसा बरकरार रखा है। उन्हें फिर से गुजरात का प्रभारी नियुक्त किया है। गुजरात में लोकसभा की 26 सीटें हैं और पिछली बार भाजपा ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी। उत्तराखंड के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत को हिमाचल प्रदेश का प्रभारी बनाया है। यहां लोकसभा की कुल 04 सीटें हैं और सभी पर भाजपा की जीत हुई थी।

इनके अलावा पार्टी ने बिहार भाजपा अध्यक्ष मंगल पांडेय को झारखंड का प्रभारी बनाया है। वहां अगले साल लोकसभा के साथ-साथ विधान सभा चुनाव भी होने हैं। पांडेय इससे पहले हिमाचल के प्रभारी थे, जहां भाजपा की प्रचंड जीत हुई थी। पार्टी महासचिव अरुण सिंह पहले की तरह ओडिशा के प्रभारी बने रहेंगे। इन चेहरों के अलावा नलिन कोहली को नागालैंड, नितिन नवीन को सिक्किम, अरविंद लिम्बावली को तेलंगाना और केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत को उत्तराखंड का प्रभारी बनाया गया है।

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