अटल बिहारी के जन्मदिन को बेहद खास तरीके से मनाएगी भाजपा, प्रधानमंत्री मोदी करेंगे संबोधित

भाजपा नेता दिनेश प्रताप सिंह ने अमर उजाला को बताया कि कृषि कानूनों को लेकर कुछ लोग किसानों के मन में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन (25 दिसंबर) को भाजपा बेहद खास तरीके से मनाने की तैयारी कर रही है। इस दिन दिल्ली के सभी 280 मंडलों में कवि सम्मेलन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सभी जगहों पर वर्चुअल सभा आयोजित की जाएगी जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 बजे संबोधित करेंगे। पार्टी के सांसद, संगठन के पदाधिकारी और अन्य शीर्ष नता इनमें से कुछ जगहों पर उपस्थित रहेंगे। 

इन कार्यक्रमों के जरिए भाजपा किसानों के मन में कृषि कानूनों को लेकर फैले ‘भ्रम’ को भी दूर करने का काम करेगी। इसके लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी दिन उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक विशेष कार्यक्रम में भाग लेंगे और एक चिकित्सकीय संस्था का उद्घाटन करेंगे। इसके लिए भी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।

एक रणनीति के तहत भाजपा पूरे देश में कार्यक्रम चलाकर किसानों के मन में कृषि कानूनों को लेकर फैलाए जा रहे ‘भ्रम’ को दूर करने का प्रयास कर रही है। इसके लिए भाजपा प्रधानमंत्री की लोकप्रियता का भी इस्तेमाल कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात और मध्यप्रदेश के किसानों को संबोधित कर चुके हैं। इसके बाद दिल्ली और उत्तर प्रदेश के किसानों को संबोधित करेंगे। अन्य राज्यों में भी इस तरह के कार्यक्रम किए जाने की संभावना है।

भाजपा नेता दिनेश प्रताप सिंह ने अमर उजाला को बताया कि कृषि कानूनों को लेकर कुछ लोग किसानों के मन में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें विपक्षी दलों के साथ-साथ कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं जो देश की अखंडता और सुरक्षा को खतरा पहुंचाना चाहते हैं। यही कारण है कि वृहद कार्यक्रमों के जरिए किसानों की आशंकाओं को दूर करने का निर्णय किया गया है।

96वें जन्मदिन पर आएगी वाजपेयी पर नई किताब

दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक दर्शन , उनके विचारों और कार्यों पर प्रकाश डालती एक नई किताब जल्द ही पाठकों के समक्ष होगी। यह किताब ‘वाजपेयी: दि ईयर्स दैट चेंज्ड इंडिया’ नाम से प्रकाशित हो रही है, जो वाजपेयी की 96वीं जयंती पर बाजार में आएगी। इस किताब को शक्ति सिन्हा ने लिखा है जिन्होंने 1990 के दशक में वाजपेयी के साथ करीब साढ़े तीन साल तक काम किया था। 

उन्होंने वाजपेयी के नेता प्रतिपक्ष (वर्ष 1996-97) रहने के दौरान पहले उनके सचिव और 1998-99 में निजी सचिव के तौर पर काम किया था। सिन्हा ने कहा, ‘आज अटल बिहारी वाजपेयी को शिद्दत से याद किया जाता है। लोग नहीं जानते कि वर्ष 1998 में उनके लिए सरकार बनाना और फिर उसे चलाना कितना मुश्किल था।’ सिन्हा वडोदरा स्थित एमएस विश्वविद्यालय में अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिसी रिसर्च एंड इंटरनेशनल स्टडीज के मानद निदेशक हैं।

उन्होंने कहा, ‘इसके बावजूद उन्होंने परमाणु परीक्षण का और विरोधाभासी तरीके से पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाने का फैसला किया। कारगिल का जब युद्ध हुआ तो उन्होंने कैसे साहसिक तरीके से भारत की रक्षा की और प्रधानमंत्री के तौर पर सफल होने से उन्हें रोकने के लिये कैसे उनकी सरकार गिराई गई।’ इसका जिक्र किताब में है।

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