राष्ट्रीय

‘बाबा पर बवाल’ साधुओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने का बीजेपी में चौतरफा विरोध

बढ़ती जा रही हैं शिवराज की मुश्किलें, पार्टी में बगावत के सुर

भोपाल : मध्य प्रदेश सरकार ने पांच साधु-सन्यासियों को राज्य मंत्री का दर्जा दिया है। अब इन बाबाओं को राज्यमंत्री की पूरी सुविधाएं मिल रही हैं। शिवराज सिंह चौहान के इस कदम पर विपक्ष तो उन्हें लगातार निशाना बना ही रहा है, लेकिन अब खुद उनकी पार्टी में ही उनके खिलाफ विरोध के सुर फूटने लगे हैं। पार्टी के कुछ लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने 5 लोगों का समर्थन पाने के लिए 500 लोगों को पार्टी से दूर कर दिया है। इससे पार्टी को नुकसान ही होगा।

बता दें कि शिवराज सिंह चौहान ने बीते तीन अप्रैल को राज्य में, खासकर नर्मदा नदी के किनारे वाले इलाकों में पौधारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता के लिए जागरूकता फैलाने के लिए एक विशेष समिति गठित की थी। इस समिति में पांच साधु-सन्यासियों नर्मदानंद महाराज, कंप्यूटर बाबा, हरिहरानंद महाराज, भैय्यूजी महाराज और योगेंद्र महंत को नामित किया था। इस समिति के सदस्यों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है।

तमाम विरोध दलों द्वारा इस मुद्दे पर सरकार को घेरे जाने पर अब खुद बीजेपी के अंदर इस फैसले पर सवालिया निशान लगाए जाने लगे हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने कहा कि यह निर्णय किसी के गले नहीं उतर रहा है। उन्होंने कहा कि कोई सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाए और सरकार उसे प्रलोभन दे, यह मनोवृत्ति ठीक नहीं है। ऐसा होता रहा तो लोग बिना वजह सरकार पर आरोप लगाना शुरू कर देंगे सरकारी सुविधाओं के लिए। संतों के चयन पर भी रघुनंदन शर्मा ने सवाल उठाते हुए कहा कि इन 5 संतों को ही क्यों चुना, इनसे ज्यादा विद्वान संत भी हैं। उन्होंने कहा कि 5 लोगों का समर्थन पाने के लिए 500 लोगों का समर्थन खो दें, यह बुद्धिमानी भरा निर्णय नहीं हो सकता।

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