भाजपा का दांव: शिवराज की जायेगी कुर्सी? इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों पर भी पार्टी की कड़ी नजर

अगले साल उत्तराखंड, गुजरात, यूपी, पंजाब सरीखे कुल पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उसके बाद कर्नाटक में भी चुनाव होने हैं। ऐसे में अब भाजपा लगातार अपनी सियासी जमीन को मजबूत करने में लगी हुई है। कई राज्यों के नेतृत्व में बड़े फेरबदल के बाद अब पार्टी अन्य अपने शासित राज्यों की जमीनी नब्ज को टटोलने में लगी हुई है। यही वजह है कि हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों के नेतृत्व को लगातार दिल्ली तलब कर रही है। इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों का लगातार दिल्ली दौरा चल रहा है। ताजा हालात मध्यप्रदेश पर है।

इस बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की बुधवार को दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीते दो माह में शिवराज चौहान की दिल्ली यात्राओं को लेकर कई तरह की अटकलें रहीं हैं। माना जा रहा है कि दो माह में अब तक लगभग 5 बार शिवराज दिल्ली की दौड़ लगा चुके हैं।

दरअसल, खंडवा लोकसभा सीट को लेकर होने वाला उपचुनाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अभी इसका ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन भाजपा भावी बदलाव की संभावनाओं में इस उपचुनाव की रणनीति को भी साथ लेकर चल रही है। बता दें कि है कोरोना की दूसरी लहर के बीच दमोह विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा को करारी मात झेलनी पड़ी थी। चुनाव आयोग इस महीने जो उपचुनाव करा रहा है उसके साथ उसने विभिन्न राज्यों की खाली सीटों को लेकर भी राज्यों के प्रशासन से चर्चा की थी। तब मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव ने कहा था कि राज्य में बाढ़, त्यौहार व महामारी के चलते अभी स्थितियां ठीक नहीं है इसलिए त्यौहारों के बाद चुनाव कराए जाने चाहिए।

वहीं, कर्नाटक में भी भाजपा को पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने नसीहत दे डाली है कि अकेले मोदी लहर के दम पर राज्य चुनाव को नहीं जीता जा सकता है। इधर हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के सीएम जय राम ठाकुर, मनोहर लाल खट्टर क्रमश: अपनी कुर्सी को बचाने में लगे हुए हैं। हरियाणा सरकार किसान आंदोलन के बाद से लगातार बैकफुट पर हैं।

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