सत्ता में वापसी के लिए इन पांच राज्यों की 208 सीटों पर है बीजेपी की नजर

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बीते मंगलवार को बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं उपमुख्यमंत्रियों की बैठक में पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए अपनी तैयारियों एवं संगठनात्मक स्थिति पर चर्चा की थी. इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, नितिन गडकरी आदि ने भी हिस्सा लिया था. बीजेपी ने जोर दिया कि अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में सभी को साथ लेते हुए नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी पहले से अधिक बहुमत से सरकार बनाएगी. सत्ता में वापसी के लिए पार्टी की नजर पांच बड़े राज्यों की 208 सीटों पर है. ये राज्य हैं: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र. 2014 के चुनाव में इन पांच राज्यों की 208 सीटों में से बीजेपी ने 192 सीटें जीती थीं. इस तथ्य को ध्यान में रखकर ही चुनाव की रणनीति बनाई जा रही है. सवाल यह है क्या ये बीजेपी के लिए यह आसान होगा? आइये इन पांचों राज्यों के समीकरणों पर एक नजर डालते हैं:

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की स्थिति
केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी ने यह भी दावा किया कि इस साल के अंत तक मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी पार्टी जीत दर्ज करेगी. मध्य प्रदेश में लोकसभा की 29 सीटें हैं जबकि छ्त्तीसगढ़ में 11 सीटें हैं. 2014 के चुनाव की बात करें तो मध्य प्रदेश में बीजेपी को 29 में से 27 सीटें मिली थीं. कांग्रेस की ओर से ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ ही अपना गढ़ बचा पाए थे. इसी तरह से छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 11 में से 10 सीटें जीती थीं. कांग्रेस को सिर्फ दुर्ग सीट पर जीत मिली थी. इन दोनों राज्यों में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं. हाल में आए चुनावी सर्वों में इन दोनों राज्यों में बीजेपी की राह मुश्किल बताई गई है. वहीं, बीजेपी फिर से जीत का दावा कर रही है. अगर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की वापसी नहीं हुई तो मिशन 2019 की राह बहुत मुश्किल हो जाएगी.

राजस्थान में बीजेपी की स्थिति
2014 के लोकसभा चुनाव में राजस्थान में बीजेपी ने क्लीन स्वीप करते हुए 25 की 25 सीटों पर परचम फहराया था. राजस्थान में भी 2018 के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. वसुंधरा राजे गौरव यात्रा निकालकर सत्ता में फिर से वापसी के लिए पूरा जोर लगा रही हैं. राजस्थान विधानसभा चुनाव के कुछ प्रीपोल सर्वे सामने आए हैं जिसमें दावा किया गया है कि वसुंधरा सरकार सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है. ऐसे में अगर वसुंधरा सरकार सत्ता में वापस नहीं आई तो निश्चित रूप से इसका असर लोकसभा चुनाव 2019 में दिखेगा और हो सकता है कि बीजेपी इस बार क्लीन स्वीप न कर पाए. अगर परिणाम इसके उलट रहा तो बीजेपी राहत की सांस ले सकती है.

महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के हालात
2014 के चुनाव के समय महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार नहीं थी. इन दोनों राज्यों में चुनाव 2014 के बाद हुए. दोनों राज्यों में बीजेपी ने सरकार बनाई. इसमें उत्तर प्रदेश में पार्टी ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया था. हालांकि योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद बदले राजनीतिक हालात में सपा-बसपा के गठबंधन के सामने बीजेपी गोरखपुर और फूलपुर का लोकसभा चुनाव हार गई. इतना ही नहीं पार्टी कैराना में जीत दर्ज करने में विफल रही. ऐसे में बीजेपी के लिए महागठबंधन बड़ी चुनौती बनकर उभरा है. उधर, महाराष्ट्र में शिवसेना और बीजेपी के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. शिवसेना पहले ही घोषणा कर चुकी है कि वह लोकसभा चुनाव बीजेपी के साथ मिलकर नहीं लड़ेगी. महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी मिलकर चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं.

महाराष्ट्र में अगर शिवसेना, बीजेपी और एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन के बीच त्रिकोणीय मुकाबला हुआ तो बीजेपी को फायदा मिल सकता है. हालांकि पिछले कुछ उपचुनावों तीनों प्रमुख दलों ने एक दूसरे को मात देने के लिए बिल्कुल अलग रणनीति बनाई. कई मुकाबलों से ऐन वक्त पर शिवसेना ने दूरी बनाकर मुकाबले को रोचक बनाया था. अगर 2019 चुनाव में शिवसेना ने यही रणनीति अपनाई तो बीजेपी को नुकसान हो सकता है.

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