ब्लैकबक केस: 20 साल पहले जब गांव वालों को बंदूक दिखा कर भाग निकले थे सलमान

2 अक्टूबर 1998 को गुडा बिश्नोई के रहने वालों ने वन विभाग के आॅफिस आकर 2 काले हिरणों का शिकार होने का दावा किया था.

मुंबई: 2 अक्टूबर 1998 को गुडा बिश्नोई के रहने वालों ने वन विभाग के आॅफिस आकर 2 काले हिरणों का शिकार होने का दावा किया था. इन चश्मदीद गवाहों के मुताबिक, गुडा बिश्नोई के रेजिडेंट्स पटाखों की आवाज से गूंज उठे और गांव के आसपास एक मारूति जिप्सी की संदिग्ध मूवमेंट देखी. ये आवाज सुनने के बाद एक चश्मदीद अपने घर से बाहर निकला और बाकी गांववालों को लेकर सभी घटनास्थल पर पहुंचे थे। जहां उन्होंने दो काले हिरणों को मृत हालत में पाया। गांववालों ने जिप्सी का रजिस्ट्रेशन नंबर नोट किया। गांववालों ने जिप्सी को रोकने की कोशिश की थी लेकिन सलमान ने उनको बंदूक दिखाई और वहां से भाग निकले थे। गांववालों ने बाइक पर सवार होकर सलमान की गाड़ी का पीछा भी किया था लेकिन वे असफल रहे।

7 अक्टूबर को ये केस फारेस्ट अफसर ललित बोरा को सौंपा गया था। जांच में पता चला कि जिप्सी अरुण यादव की थी, जिसने गाड़ी एक्टर को किराए पर देने की बात कही थी। ब्लैकबक केस की पूछताछ के दौरान फॉरेस्ट अधिकारियों को एक्टर के चिंकारा शिकार मामले से जुड़े होने का पता चला। जिसका खुलासा दुलानी ने किया था। उसने कहा था- सलमान और सैफ गाड़ी की पहली सीट पर बैठे थे जबकि नीलम, सोनाली, तब्बू पीछे। जंगली जानवर का शिकार करते वक्त जब सलमान टारगेट मिस करते तो सैफ उन्हें फोकस करने को कहते थे। दुलानी के इस गवाह के बाद एक्टर को सेट से अरेस्ट किया गया था।

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