छत्तीसगढ़

सिम्स के ब्लड बैंक कर्मियों की ‘ दरियादिली ‘ ऐसी कि 250 बच्चों को मुफ्त में मिल जाता है रक्त

अंकित मिंज

बिलासपुर।

थैलेसीमिया.सिकलिन जैसी गंभीर बीमारी से पीडि़त गरीब बच्चों के लिए सिम्स की ब्लड बैंक किसी मसीहा से कम नहीं है। यहां प्रति माह करीब 250 बच्चों के लिए नि:शुल्क ब्लड की व्यवस्था की जाती है। जब कहीं से रक्त नहीं मिलता, तब ब्लड बैंक का समूचा स्टाफ मानवता का परिचय देते हुए रक्तदान करने के लिए आगे आता है। ब्लड बैंक में बर्न, कैंसर, लावारिस व गर्भवती महिलाओं और एक्सीडेंटल केसों में भी खून का इंतजाम किया जाता है।
इस तरह मरीजों को प्रति माह 250 से 300 यूनिट ब्लड नि:शुल्क दिया जाता है।

ब्लड बैंक प्रभारी से लेकर सिम्स के वार्ड ब्वॉय तक सभी रक्तदान करते हैं। गंभीर बीमारियों से पीडि़त रजिस्टर्ड 250 मरीजों को प्रति मरीज 1 या 2 यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है। इसके अलावा अन्य मरीजों के लिए भी आपात स्थिति में खून की आवश्यकता होती है। सिम्स ब्लड बैंक में खून की जरूरत को पूरा करने के लिए सिम्स प्रबंधन समय.समय पर रक्तदान शिविर आयोजित करता है। शिविर में समाज की विभिन्न संस्थाएं भी भाग लेती हैं। शिविर से एकत्रित होने वाले रक्त से आपात स्थिति में मरीजों की जान बचाई जाती है।

राज्य स्तर पर मिल चुका है सम्मान, बेटे से भी रक्तदान कराती हैं शिप्रा सिंह : सिम्स ब्लड बैंक का प्रभार संभाल रहीं स्टाफ नर्स शिप्रा सिंह अभी तक 25 बार रक्तदान कर चुकीं हैं। शासकीय कार्य के साथ समाजसेवा करने पर उन्हें वर्ष 2016.17 में राज्य स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है।

वे अपने बेटे को भी रक्तदान करातीं हैं। शिप्रा सिंह के मुताबिक रक्तदान से कोलेस्ट्राल कंट्रोल होता है। बीमारियों से बचा जा सकता है। हमारे शरीर में 5 से 7 लीटर खून होता है इसमें से केवल 300 ग्राम रक्त दान करके हम किसी का जीवन बचा सकें , तो ये हमारे लिए सौभाग्य की बात है।

रक्तदान करने वाला ब्लड बैंक स्टाफ :

शिप्रा सिंह इंचार्ज नर्स ब्लड बैंक सिम्स, विजय पैकरा लेब टेक्निशियन, अभिषेक जेकय रिकॉर्ड क्लर्क, विवेक शर्मा लेब टेक्निशियन, रमाशंकर साहू स्टोर कीपर, अजय साहू चालक, दिनेश कुर्रे वेन अटेंडेंस, मनीष चतुर्वेदी लेबटेक्निशियन, नीरज वार्ड वॉय, राम नाथ, मेडीकल कॉलेज के छात्र।

प्राइवेट संस्थाएं भी सहयोग के लिए आयोजित करतीं हैं शिविर :

निरंकारी मंडल के सदस्य साल में दो बार रक्तदान करते है। गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी। एचडीएफसी बैंक कर्मचारी। लाफार्ज, डीपी कॉलेज। एनसीसी कैडेट व जेके कॉलेज सहित अन्य संस्थाएं।

निगेटिव कैटेगरी का स्टॉक रखना कठिन

निगेटिव कैटेगरी के ब्लड का स्टॉक बनाकर रखना कठिन होता हैए हम किसी तरह सब मैनेज करते हैं। ये धारणा गलत है कि ब्लड देने से कमजोरी आती है। ब्लड बैंक के कर्मचारी भी रक्तदान करते हैं, मै स्वयं नियमित रूप से मरीजों के लिए ब्लड डोनेट करती हूं।
शिप्रा सिंह, सिम्स ब्लड बैंक इंचार्ज

नवजात बच्चों को उपलब्ध कराते ब्लड : सिम्स रक्त कोष के कर्मचारीए मेडिकल छात्र अपने जन्मदिन या खास दिनों में सिम्स के ब्लड बैंक आकर रक्तदान करते है। रक्तकोष का स्टॉफ आपातकालीन में छोटे.छोटे नवजात बच्चों को रक्त उपलब्ध कराता है। शासकीय कार्य के साथ.साथ समाज सेवा करने की ये अनूठी मिसाल है।
डॉ बीपी सिंह, सिम्स अस्पताल अधीक्षक

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सिम्स के ब्लड बैंक कर्मियों की ' दरियादिली ' ऐसी कि 250 बच्चों को मुफ्त में मिल जाता है रक्त
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