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ऐसा स्कूल जहां छात्र हाथ में छतरी लिए बेंच पर खड़े होकर करते हैं पढ़ाई

झारखंड के बोकारो जिले में पिछले 5 सालों से बच्चे छतरी लगाकर बेंच पर खड़े होकर पढ़ने को मजबूर हैं. वहीं इस ओर न तो सरकार का कोई ध्यान है और ना ही शिक्षा विभाग या जिला प्रशासन इसकी सुध ले रहा है. मामला सेक्टर-2 में स्थित राजकीयकृत उच्च विद्यालय लकड़ाखंदा का है.

शहर के बीचोबीच स्थित यह एक मात्र प्लस-2 सरकारी स्कूल है, जहां कक्षा एक से प्लस टू तक की पढ़ाई होती है. इस स्कूल में दूर-दूर से बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं. छात्र-छात्राओं की स्थिति यह है कि आधे से ज्यादा बच्चों ने स्कूल में सही व्यवस्था न होने के कारण स्कूल आना ही छोड़ दिया है.

दरअसल, 1100 छात्र-छात्राओं वाले इस स्कूल में बारिश के कारण 500 से 600 बच्चे ही पढ़ने के लिए आ रहे हैं.

छात्रों का कहना है कि स्कूल के हर क्लास में पानी टपकता रहता है, जिससे उन्हें पढ़ाई करने में परेशानी होती है.

वहीं उन्हें हमेशा डर भी लगा रहता है कि कहीं कोई घटना न हो जाए. इसलिए वे सही ढंग से क्लास में पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं.

बीएसएल प्रबंधन द्वारा सन् 1991 में यह भवन प्लस-2 की पढ़ाई के लिए शिक्षा विभाग को सौंपा गया था. तब से लेकर आज तक भवन की मरम्मती को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ता गया. आज इस विवाद का सबसे ज्यादा खामियाजा स्कूल के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है.

स्थिति यह है कि अब भवन को बनाने के लिए सिर्फ कागजी कार्रवाई ही चल रही है. अगर ऐसा ही चलता रहा तो एक मात्र सरकारी प्लस-2 स्कूल जल्द ही बंद हो जाएगा, जिससे यहां पढ़ने वाले कई बच्चों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा.

स्कूल के प्रभारी प्रिंसिपल उमापति मिश्र का कहना है कि मामले की जानकारी शिक्षा विभाग को कई बार दी गई है. विधायक ने भी आश्वासन दिया है, लेकिन स्थिति यह है कि आधे से ज्यादा बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं.

वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी महीप कुमार सिंह ने कहा कि भवन की देखरेख बीएसएल को करनी थी लेकिन उन्होंने नहीं किया. अब राज्य सरकार द्वारा नया कमरा बनाने की बात कही जा रही है. साथ ही जल्द सभी कमरों की मरम्मती की बात कही है.

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