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बांबे हाईकोर्ट ने लाटरी को लेकर सुनाया ये फैसला,जानें किस दायरे में आता है ये

कंपनी ने लाटरी पर महाराष्ट्र कर अधिनियम 2006 की वैधता को चुनौती दी थी

मुंबई, प्रेट्र: बांबे हाईकोर्ट ने लाटरी के मामले में बड़ा फैसला देते हुए कहा है कि लॉटरी शर्त और जुआ के दायरे में आती है। यह व्यवस्था देते हुए हाई कोर्ट ने लाटरी टिकटों की बिक्री पर कर लगाने के कर का महाराष्ट्र सरकार के अधिनियम को बरकरार रखा है।

जस्टिस एससी धर्माधिकारी और जस्टिस भारती डांगरे की खंडपीठ ने पिछले सप्ताह मंगल मूर्ति मार्केटिंग नाम की कंपनी की याचिका खारिज कर दी थी। कंपनी ने लाटरी पर महाराष्ट्र कर अधिनियम 2006 की वैधता को चुनौती दी थी।

यह कंपनी अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड सरकार की लाटरी के सब-डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में काम करती है। कंपनी ने हाई कोर्ट से महाराष्ट्र सरकार को राज्य के पश्चिमी हिस्से में लाटरी टिकटों की बिक्री पर कर लगाने या जमा करने से दूर रहने का निर्देश देने की मांग की थी।

अधिनियम के तहत लाटरी टिकटों के प्रमोटरों पर कर लगाया गया है। प्रमोटर के लिए कर अधिकारियों को लाटरी योजना से संबंधित स्टेटमेंट देना अनिवार्य किया गया है। प्रमोटर को अधिनियम के तहत लगने वाले कर का अग्रिम भुगतान करना होता है।

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