हड्डियों को कमजोर कर देती हैं ये बीमारी, जानें लक्षण

हर साल 25 मिलियन लोगों को प्रभावित करती हैं ये बीमारी।

ऑस्टियोपोरोसिस तब होता है, जब नई हड्डी बनने और पुरानी हड्डी के अवशोषण में असंतुलन होता है। इससे हड्डी का घनत्व कम हो जाता है। ऐसे में हड्डी कमजोर और नाजुक हो जाती है तथा हड्डी टूटने या फ्रैक्चर होने का जोखिम बढ़ जाता है।

हड्डी के कमजोर होने की इस समस्या का जल्द पता भी नहीं चल पाता। ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या हर साल 25 मिलियन लोगों को प्रभावित करती है।

आंकड़ों से पता चलता है कि पांच करोड़ भारतीयों को ऑस्टियोपोरोसिस है। वैसे तो किसी भी हड्डी या जोड़ में फ्रैक्चर हो सकता है, लेकिन ऑस्टियोपोरोसिस आमतौर पर वर्टिब्रल और कूल्हों के फ्रैक्चर के रूप में सामने आता है।

हड्डियों को जानें

हड्डी के सामान्य निर्माण के लिए कैल्शियम और फॉसफेट दो आवश्यक खनिज हैं। युवा अवस्था में हड्डी बनाने के लिए शरीर इन खनिजों का उपयोग करता है।

हृदय और मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंगों को चालू रखने के लिए शरीर हड्डियों में रहने वाले कैल्शियम को फिर से जज्ब कर लेता है, ताकि खून में कैल्शियम का स्तर दुरुस्त रखा जा सके।

ऐसे में भोजन में कैल्शियम की मात्रा कम हो या शरीर खाद्य पदार्थों से पर्याप्त कैल्शियम न प्राप्त करे तो अस्थि निर्माण या अस्थि टिश्यू प्रभावित हो सकते हैं।

नतीजतन हड्डियां कमजोर, भंगुर या नाजुक हो सकती हैं, जिनके आसानी से टूटने का खतरा रहेगा।

महिलाओं पर अधिक असर

ऑस्टियोपोरोसिस आमतौर पर रजोनिवृत्त महिलाओं में होता है, लेकिन ज्यादातर पुरुषों और महिलाओं में 40 साल के बाद होता है।

ऑस्टियोपोरोसिस अकसर उम्र बढ़ने पर होता है, क्योंकि बोन टिश्यू के नष्ट होने की रफ्तार बढ़ती जाती है, खासकर उनके मामले में जो 65 साल से ऊपर के हैं।

महिलाओं में रजोनिवृत्ति के समय (करीब 50 साल की उम्र में) अंडाशय के काम करना बंद करने से हड्डियों का नुकसान काफी तेज हो जाता है।

इसलिए, ज्यादातर महिलाएं ऑस्टियोपोरोसिस की डायग्नोस्टिक स्थिति में 70-80 साल की उम्र में पहुंचती हैं।

कुछ कारणों से जोखिम बढ़ता है, जैसे गोरी त्वचा, छोटी अस्थि संरचना, परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास, शरीर का कम वजन, कम कैल्शियम वाला भोजन, निष्क्रिय जीवनशैली, अत्यधिक अल्कोहल का सेवन, तंबाकू का उपयोग, खाने में गड़बड़ी, कुछ दवाइयों जैसे स्टेरॉयड आदि का उपयोग।

हड्डियों के कमजोर होने के शुरुआती चरण में कोई लक्षण नहीं होते हैं। पर इसकी वजह से एक बार हड्डियां कमजोर हो जाएं तो कमर दर्द शुरू हो सकता है।

हड्डियों की जांच है जरूरी

बोन डेन्सिटी (अस्थि घनत्व) कम होने का पता लगाने के लिए बोन मिनरल डेन्सिटी टेस्ट एक सुरक्षित और दर्द हीन तरीका है। इससे आपके अस्थि रोग विशेषज्ञ को आपकी हड्डियों की शक्ति और भविष्य में हड्डी टूटने का जोखिम समझने में सहायता मिलेगी।

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