सरकारी योजना से हुई बोरिंग, कोयला गीला कर किया जा रहा वजन बढ़ाने का खेल

सब कुछ जानकर भी अंजान बने हुए हैं अधिकारी

बिलासपुर: जहां ग्रामीण क्षेत्रों में पीने से लगकर निस्तारी तक की पानी की कमी हो रही है गांव के तालाब सुख गए है वहीं कुछ लोग अपने छोटे से लाभ के लिए पानी को बेचने का काम कर रहे है. एक ऐसा ही मामला गतौरा बाईपास के पास हो रहा है। यहां पर चन्द्रशेखर राठौर नाम का व्यक्ति जिसके खेत में सरकारी योजना के तहत बोरिंग हुई है। वो खेत के पानी से कोयले के ट्रकों को गीला करता है। ऐसा काम दिन भर में एक या दो ट्रकों का नहीं बल्कि सुबह और शाम रोज 15-15 ट्रक में पानी डाला जाता है.

देखने ऐसा लगता है कि यह साधारण ट्रक धोने का काम किन्तु असल काम कुछ ओर ही है. ये ट्रक 30 टन कोयले से भरे रहते है और तीन ईंच मोटी धार से इन्हें लगभग 20 से 25 मिनट तक गीला किया जाता है. इससे एक तरफ कोयले से धूल नहीं उड़ती किन्तु पूरा खेल वजन का है. गीला करने के पहले अथवा बाद में कुछ मात्रा में कोयला क्षेत्र के ढाबों में अवैध तरीके से उतार दिया जाता है. बाद में इसी दो नंबर के कोयले को बेच दिया जाता है. जो कोयला खदान से सूख कर आता है वह गीला होने के कारण वजन बढ़ जाता है.यह एक किस्म से कोयले की तस्करी है.

बताया जा रहा है कि निजी लाभ के लिए उक्त कारोबारी जिस स्तर का व्यवसाय कर रहा है उसकी अवैध कमाई को देख कर क्षेत्र के अन्य किसान भी अपने खेतों में बोरिंग करा कर कोयले को गीला करने के धंधे में उतरने को सोच रहे हैं. क्षेत्र के लोग बताते है कि चन्द्रशेखर को प्रति ट्रक पानी डालने के 500 रुपए मिलते हैं. रोज इस खेत के सामने 40 से 50 ट्रक कोयला गीला किया जाता है. क्षेत्र के विद्युत विभाग अधिकारी को इस पूरे खेल की जानकारी पिछले चार माह से है. उन्हें उस नियम तथा उपनियम की भी जानकारी है जिसके तहत चन्द्रशेखर के विरूद्ध कृषि उपयोग के पानी का औद्योगिक उपयोग में खरीदी बिक्री का मामला बनता है. किन्तु विद्युत अधिकारी सब कुछ जानकर भी अंजान बने हुए हैं.

पानी के गलत इस्तेमाल से खराब हुई सड़कें :-

खेत के पानी को घंटों तक रोड पर डालने से क्षेत्र की सड़क खराब हो रही है। पहले तो गीले ट्रक लंबी कतार लगा कर चंद्रशेखर के खेतों के पास खड़े रहते हैं. जिससे इतने क्षेत्र की सड़क से डामर गायब हो गया है और बड़े गड्ढे बन गए हैं। गातौर बाईपास (मोपका से जयरामनगर पहुंच मार्ग) अनिल बिल्डकॉन ने बनाया था. बाद में सड़क का हाल देख कर इसी काम को आधार बनाकर इस कंपनी को काली सूची में डाला गया था. एक ओर सड़क की गुणवत्ता खराब थी दूसरी तरफ रही-सही कसर गीला कोयला लेकर चलने वाले ट्रकों ने पूरी कर दी. बाईपास मार्ग बरिश के पूर्व ही बेहाल हो रहा है.

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