छत्तीसगढ़

दोनों बेटे हुए कोरोना संक्रमित, लेकिन नहीं खोया धैर्य, सुरक्षा और सही इलाज से लौटे सकुशल घर

लोगों को दे रहीं है सावधानी व सुरक्षा बरतने की सीख

ज्वाइंट डायरेक्टर हेल्थ और कोविड अस्पताल की इंचार्ज डॉ. मधुलिका सिंह के जीवन में कोरोना संक्रमण के दौरान एक पल ऐसा भी आया जब उन्हें मां की ममता और डॉक्टर के फर्ज दोनों में से किसी एक को चुनना था।

यह पल था बीते 24 जुलाई की शाम 7.30 बजे काजब डॉ. सिंह को पता चला की उनका बेटा डॉ. अपूर्व कोविड-19 पॉजिटिव हो गया है। एक पल के लिए तो उन्हें ऐसा लगा मानों उनके शरीर से किसी ने जान ही निकाल ली है।

पांच मिनट तो वह कुछ बोल ही नहीं पाईं, क्योंकि एक मां की ममता उन्हें कुछ सोचने समझने नहीं दे रही थी लेकिन कुछ क्षणों बाद डॉ. सिहं ने एक अच्छे डॉक्टर और कोविड हॉस्पिटल इंचार्ज का फर्ज समझा और सीधे उस कमरे में पहुंची जहां उनके बेटे ने खुद को क्वरंटाइन करके रखा था।

डॉ. सिंह ने अपूर्व को बाहर से आवाज दी कि उसकी कोविड-19 टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई है और उसे हॉस्पिटल जाना होगा। यह कहानी बयां करते-करते डॉ. सिंह की आंखे नम हो गईं लेकिन वह भागवान का धन्यवाद करते दिखीं कि उनके उम्रदराज़माता-पिता सुरक्षित रहे|

डॉ. सिंह ने बताया 24 जुलाई की शाम उनके मोबाइल में डिप्टी कलेक्टर व जिले की नोडल अफसरअंशिका मैडम का फोन आया और उन्होंने ही सबसे पहले यह जानकारी दी। उन्होंने डॉ. सिंह को दिलासा दिया और घर में एक डॉक्टर की भूमिका अदा करने को कहा। इसके बाद डॉ. सिंह ने सबसे पहले अपनी 84 साल की मां को उनके दूसरे घर भेजा। 87 वषीर्य उनके पिता वहीं रहे।

पूरी रात उन्होंने जाग कर बितायीऔर बेटे को खुद के ऑब्जर्वेशन में रखा। अगली सुबह कोविड हॉस्पिटल से गाड़ी आई और डॉ. अपूर्व को हॉस्पिटल लेकर गई। वहां कुछ दिन के इलाज के बाद ही उनकी टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आ और उन्हें डिस्चार्ज किया गया।

Tags

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button