विपक्ष के लिए ब्रह्मास्त्र साबित हुई है जेपीसी, अब तक 6 बार बनी और चली गई सरकार

जब-जब जेपीसी बनाई गई है, सत्तारूढ़ पार्टी का सफाया

नई दिल्ली:राफेल सौदे को लेकर राहुल के मोदी सरकार पर लगातार हमले से संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की मांग फिर उठ रही है। इससे पहले यूपीए कार्यकाल में हजारों करोड़ रुपए के कथित 2जी घोटाले की जांच के लिए जेपीसी के गठन की घोषणा की गई थी।

लेकिन जब-जब जेपीसी बनाई गई है, सत्तारूढ़ पार्टी का सफाया हो गया है यानी सरकार ही चली गई। ऐसे में आरोप लग रहे हैं कि इस बार फिर उठी जेपीसी की मांग पर भाजपा बच रही है।

शायद कांग्रेस के फायदों और भाजपा को होने वाले नुकसान को देखते हुए ही वित्त मंत्री अरुण जेटली और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जेपीसी जांच की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है।

याद दिला दें कि यूपीए सरकार के सत्ता में रहने के दौरान 22 फरवरी, 2011 को बजट सत्र के पहले दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हजारों करोड़ रुपए के कथित 2जी घोटाले की जांच के लिए जेपीसी के गठन की घोषणा की थी।

इसके बाद अगले तीन साल, 2014 के लोकसभा चुनाव तक सत्तारूढ़ यूपीए सरकार को घेरने के लिए 2जी भाजपा के लिए सबसे महत्वपूर्ण मसलों में से एक साबित हुआ।

वहीं अब कांग्रेस राफेल सौदे की जेपीसी से जांच कराने की मांग कर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस मसले पर लगातार सरकार को घेर रहे हैं,

लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा उनकी मांग को नजरअंदाज कर रही है। अगर जेपीसी का इतिहास देखा जाए तो यह पता चलता है कि विपक्षी के लिए जेपीसी ब्रह्मास्त्र साबित हुआ है।

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