श्रीमद भागवत पुराण के अपमान में ब्राह्मण समाज और धर्माचार्यों ने जताई कड़ी आपत्ति

विगत दिनों गुढ़ियारी में चल रहे धार्मिक कार्यक्रम के दौरान यह दुर्भाग्यपूर्ण हुई थी

रायपुर। श्रीमद भागवत महापुराण में शरारती तत्वों के द्वारा किए गए आस्था के अपमान के विरोध में शुक्रवार को समस्त ब्राह्मण समाज और धर्माचार्यों ने एकत्रित होकर कड़ा विरोध जताया। विगत दिनों गुढ़ियारी में चल रहे धार्मिक कार्यक्रम के दौरान यह दुर्भाग्यपूर्ण हुई थी। भागवताचार्य पंडित युगल किशोर जी महाराज ने कहा कि ऐसे दुष्टों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।

धर्म अर्थात सत्य संविधान का आधार है और धार्मिंक कार्यों में की जाने वाली उदंडता भारत की अस्मिता पर कड़ा प्रहार है। हमारे देश का इतिहास बड़े ही गौरवपूर्ण गाथाओं से परिपूर्ण है। समय समय पर कई उपद्रवी हमारी एकता और अखंडता को चूर चूर करने का असंभव प्रयास करते रहते है। लेकिन वे स्वयं नष्ट हो जाते है।

अपराधी तत्वों को दंड देने का पूर्ण अधिकार

पंडित जी ने समाज से आव्हान किया कि “राजा” चाहे वह देश का हो प्रदेश का हो सर्वतंत्र स्वतंत्र होता है। उसे अपराधी तत्वों को दंड देने का पूर्ण अधिकार प्राप्त होता है।

लेकिन यदि राजा से भी कोई भूल और अनजाने में ही सही अपराध हो जाए तो धर्म उसे दंड देता है, इसलिए “राजनीति” धर्मानुकूल हो तभी चरमोत्कर्ष की प्राप्ति कर सकती है। अन्यथा राज और नीति के दो अलग मायने हो जाएंगे और यह समाज और देश दोनों के लिए घातक होगा।

समाज से अनुरोध किया कि ऐसी घटनाओं पर हम सब एक होकर किसी धर्म विशेष के खिलाफ आवाज न उठाकर केवल अपराध और अपराधी को सजा देने की बात रखें।

क्योंकि दुर्जनों का अभिप्राय ही सामाजिक समरसता को भंग कर अपना स्वामित्व स्थापित करने का होता है। ये अलग बात है कि इनका शोर अत्यधिक होता है लेकिन हिन्दू धर्म न तो नूतन है न पुरातन यह केवल सनातन है जिसे कोई न मिटा सका है और न मिटा पाएगा।

भविष्य में ऐसी घटना पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन करने की दी चेतावनी

संत महासभा के छत्तीसगढ़ प्रमुख स्वामी राजेश्वरानंद जी ने अपराधियों को सख्त से सख्त सजा देने की बात कही। तथा भविष्य में ऐसी घटना की पुर्नावृत्ति होने पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन करने की चेतावनी दी।

साथ ही उन्होंने शासन और प्रशासन की ओर से अब तक की गई कार्यवाही के लिए साधुवाद दिया। सभा में उपस्थित ज्योतिषाचार्य वासुदेव त्रिपाठी ने कहा कि हिन्दू धर्म पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ताकि ऐसी घटना दुबारा न घटे। भागवताचार्य सत्यनारायण तिवारी ने भी श्रोताओं की एकजुटता की प्रशंसा करते हुए सभा में धर्मोजय का नारा लगवाया। इनके अलावा सभा में मुख्य रूप से आचार्य घनश्याम शर्मा, आचार्य देवेश गौतम, आचार्य वीरेंद्र शुक्ला, आचार्य शिवानंद शास्त्री, आचार्य विजय पांडेय, ज्योतिषाचार्य पंडित लक्ष्मीकांत, आचार्य मनोज पांडेय, आचार्य मनोज तिवारी, गिरिजाशरण द्विवेदी, दिनेश पांडेय, रूपेश दुबे, अभिषेक शर्मा, विनोद दुबे, अजय पांडेय एवं श्रीमद भागवत आचार्य वासुदेव तिवारी राजिम वाले उपस्थित रहे।

new jindal advt tree advt
Back to top button