ब्रेक्सिट डील बचाने के लिए पीएम टेरीज़ा मे की आख़िरी कोशिश

ब्रेक्सिट समझौते पर हाऊस ऑफ़ कॉमन्स में मतदान से पहले प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे आख़िरी कोशिश कर रही हैं.

सोमवार देर रात यूरोपीय संघ के नेताओं से बातचीत कर रहीं टेरीज़ा में ने सांसदों से अपील की कि वो “ब्रेक्सिट के संशोधित मसौदे” का समर्थन करें या फिर “ब्रेक्सिट को ही नकार दें”.

लेकिन टेरीज़ा मे की सरकार को समर्थन दे रहे टोरी सांसदों और डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट पार्टी के सांसदों ने ब्रेक्सिट मसौदे का समर्थन करने से इनकार कर दिया है.

उनका कहना है कि यूके सदा के लिए यूरोपीय संघ का हिस्सा ना रहे इसके लिए प्रधानमंत्री जिन क़ानूनी आश्वासनों की बात कर रही हैं वो पूरे नहीं हैं.
टोरी सांसद जेकब रीस मॉग के नेतृत्व में यूरोपीयन रिसर्च ग्रुप ने एक बयान जारी कर कहा है, “हमारे और दूसरों के क़ानूनी आकलन के अनुसार हम आज सरकार के मसौदे को स्वीकार करने का समर्थन नहीं करते.”

1922 की कमिटी ऑफ़ बैकबेंच टोरी एमपीज़ के उपाध्यक्ष चार्ल्स बेकर ने कहा कि बाद में होने वाले मतदान में यदि सरकार की हार हुई तो फिर से आम चुनाव कराने की नौबत आ सकती है.

वो कहते हैं, “संसद में फ़िलहाल जो स्थिति है वो स्थायी नहीं है.”

इससे पहले अटॉर्नी जनरल जैफ्री कॉक्स ने सांसदों से कहा था कि ब्रेक्सिट के बाद भी यूरोपीय संघ से बंधे होने के क़ानूनी ख़तरों में “कोई बदलाव नहीं होने वाला है”.

जैफ्री कॉक्स ने कहा कि प्रधानमंत्री जिन नए आश्वासनों को लेकर आई हैं उनसे “अगर भविष्य में दोनों देशों के संबंधों पर यूरोपीय संघ के ‘कम भरोसे’ से बातचीत किसी कारण बीच में टूट जाती है तो आयरलैंड के विवाद के कारण यूके के यूरोपीय संघ से अलग होने में अनिश्चितकाल का वक़्त नहीं लगेगा या फिर बिना वजह देरी नहीं होगी.”

उन्होंने ‘कम भरोसे’ के बारे में समझाते हुए इसे आयरलैंड के मुद्दे पर उचित प्रस्ताव को ख़ारिज करने का पैटर्न बताया.

हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि संतोषजनक ब्रेक्सिट समझौते के बाद दोनों के बीच व्यापारिक संबंध कैसे होंगे ये पूरी तरह से ‘राजनीतिक फ़ैसला’ होगा और इस कारण सांसदों को प्रधानमंत्री के लाए मसौदे का समर्थन करना चाहिए.

ब्रिटेन में कई लोग इसके यूरोपीय संघ से बाहर जाने का विरोध कर रहे हैं
अटॉर्नी जनरल ने कहा कि अगर विचारों में मतभेद के कारण ब्रेक्सिट के बाद समझौते पर सहमति नहीं बनी तो “समझौते के बाद भी क़ानूनी ख़तरे बने रहेंगे” और यूके के पास यूरोपीय संघ से समझौते के बिना आगे बढ़ने के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय ज़रिया नहीं होगा.

इससे पहले इसी साल जनवरी में टेरीज़ा मे ने ब्रेक्सिट मसौदे को ब्रितानी संसद में पेश किया था जिसे ख़ारिज कर दिया गया था. मतदान में कुल 432 में से मसौदे को 202 का समर्थन मिला था.

बीबीसी की राजनीतिक संपादक लॉरा क्यून्सबर्ग का कहना है कि अगर टेरीज़ा मे इस मुद्दे पर विरोधियों को अपने पक्ष में ले कर आ सकीं तो ये ‘राजनीतिक करिश्मे से कम नहीं होगा.’

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