छत्तीसगढ़

गलघोटू (घुटकी) नामक बीमारी से भैंस की मौत, पशु पालकों में डर का माहौल

रिपोटर - सुमित जालान

गौरेला पेंड्रा मरवाही: जिले में जानवरों को होने वाली बीमारी एचएस गलघोटू (घुटकी) नामक मामला सामने आया है। जिसके कारण भैंस के बच्चे की मौत हो गई है। वही एचएस गलघोटू या फिर गांव की बोलचाल भाषा में (घुटकी) नामक बीमारी का प्रकोप हवा में फैलने वाला संक्रामक बीमारी है। जो जानवरों में फैलने से जानवरों की मृत्यु हो जाती है।

ऐसा ही मामला गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के वार्ड क्रमांक 12 पेंड्रा का है जहां जानवर मालिक ज्ञानेश्वर तिवारी के यहां भैंस के बच्चे को गुरुवार की रात्रि से अचानक तबीयत बिगड़ गई, और जहां सुबह जानवर मालिक के द्वारा डॉक्टर को बुलाकर इलाज के लिए दिखाया गया जिस पर डॉक्टर के द्वारा इलाज करने के लगभग तीन घंटों में उस भैंस के बच्चे की मौत हो गई।

वही इस विषय पर चर्चा की गई तो जानवर मालिक ने बताया कि भैंस का बच्चा सुबह मेरे द्वारा पाया गया कि भैंस के बच्चे के द्वारा मुंह से घर घर की आवाज निकालने के साथ ही मुँह से पानी और आँख से आँसू निकलने के साथ दोनों तरफ का जबडा शूज कर कड़ा हो गया था।

वही जब मैंने डॉक्टर को बुलाकर भैंस के बच्चे का इलाज कराया तो डॉक्टर के द्वारा बताया गया कि यह गलघोटू या गांव की भाषा में घुटकी नामक बीमारी है। इसके फैलने से अधिकतर जानवरों की मौत हो जाती है।

वही उन्होंने बताया कि हमारे इस पेंड्रा में साथी यह एचएस बीमारी से बचाव का टीका पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में जो कि 22 मई से 15 जून तक 100% टीका लगाने का कार्यक्रम चल रहा है जिसे कुछ गांव में देखा गया है कि आज का टीका लग रहा है किंतु हमारे पेंड्रा में अभी तक यह टीकाकरण कार्य प्रारंभ नहीं किया गया है और इस बीमारी का प्रकोप हमारे शहर में प्रारंभ हो चुका है। और इस तरह के टीके लगाए जाते हैं। लेकिन हमारे इस पेंड्रा में डाक्टर सोनी करके डॉक्टर है जो कभी भी डॉक्टरों के द्वारा लगने वाले विशेष टीको का लगाओ नहीं किया जाता है।

और विभिन्न तरह के कार्य खाली कागजी कार्यवाही में ही सिमट कर रह जाती हैं। जिसके कारण हमारे जानवरों को बीमारियों से ग्रसित होना पड़ता है। साथ ही सीताराम यादव पदगंवा, मुरली राम राठौर, लल्लन सिंह राठौर, ने कहा कि हमारे जानवरों को यहां के डॉक्टरो के द्वारा किसी भी तरह का विशेष टीका लगाया नहीं जाता है और खाली चलते फिरते जानकारी भी लेकर रजिस्टर भर लिया जाता है। जिसके कारण हमारे जानवरों को किसी तरह का इलाज के संबंध में लाभ नहीं मिलता है और किसी बड़ी बीमारी होने आने की वजह से जानवरों की मृत्यु भी हो जाती है।

साथ ही जानवरों की मृत्यु हो जाने के बाद मुआवजा राशि भी जानवरों की दाम या मूल्य के बराबर भी नहीं मिलती है। वही जो मुआवजा राशि मिलती है वह जानवरों के मालिकों के द्वारा विभिन्न तरह के खर्च हो जाने के बाद भी मुआवजा राशि जानवर मालिक को नहीं मिल पाता है।

वही इस टीके एवं एच एस बीमारी के संबंधित विषय पर जब पेंड्रा क्षेत्र के चलित प्रभारी डॉक्टर से इस विषय पर बात किया गया तो डॉक्टर संजय शर्मा ने बताया कि अभी 15 जून तक जानवरों को विशेष तरह के टीके हमारे द्वारा लगाया जा रहा है। जिससे जानवरों में होने वाली बीमारियों से जानवरों को बचाया जा सके।

वहीं जब पेंड्रा में पहली बार गलघोटू के मामले में पूछने पर बताया कि यह बीमारी फैलने वाली बीमारी है जिस भी जानवर को यह बीमारी हो वहां किसी अन्य जानवरों को नहीं रखना चाहिए क्योंकि बीमार जानवरों से यह दूसरे जानवरों में फैलने का खतरा बना रहता है। वहीं उन्होंने बताया कि मैं इस पर संज्ञान लेते हुए जांच करूंगा।

और इस विषय की जानकारी लूंगा ताकि जल्द से जल्द जानवरों को लगने वाले टिके जानवरों को लग सके। वही अब इसमें हम किसकी लापरवाही मानी जाए की आखिर इनके इस तरह की लापरवाही करने वाले अधिकारी से किस तरह की आशा रख सकते हैं। जबकि डॉक्टर को भगवान के रूप में माना जाता है और डॉक्टर इलाज कर जान बचाने का काम करता है।

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