आश्रम, छात्रावासों व आवासीय संस्थाओं को बनाएं मॉडल : आयुक्त चुरेन्द्र 

संभाग के सभी जिला कलेक्टरों, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और विभाग के सहायक आयुक्तों को दिए है

रायपुर:रायपुर संभाग के आयुक्त जी.आर. चुरेन्द्र ने आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा संचालित आश्रम-छात्रावासों और आवासीय संस्थाओं को मॉडल संस्था के रूप में विकसित करने के निर्देश संभाग के सभी जिला कलेक्टरों, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और विभाग के सहायक आयुक्तों को दिए है।

संभागायुक्त चुरेन्द्र ने कहा है कि समान संसाधन और सुविधाओं की उपलब्धता के बावजूद कुछ आश्रम-छात्रावास बेहतर संचालित हो रहे है वहीं बहुत से आश्रम-छात्रावासों में की संचालन व्यवस्थाओं  में काफी कमियां देखने को मिल रही है।

इसका मूल कारण विभाग में समान कार्यपद्धति व पूर्ण जिम्मेदारी के अभाव साथ ही गंभीरता, निष्ठा व कर्मठता के साथ कार्य करने का अभाव है। उन्होंने कहा कि जब शासन द्वारा सारी सुविधाएं सभी संस्थाओं को प्रदान की जा रही है, तो ऐसी स्थिति में आश्रम छात्रावासों के संचालन व प्रबंधन में बेहतर परिणाम हर दृष्टि से आने चाहिए।

बहुआयामी योजनाएं संचालित

भारत सरकार व राज्य सरकार द्वारा बहुआयामी योजनाएं संचालित की जा रही है, स्वच्छता अभियान के माध्यम से स्वच्छता से समृद्धि की ओर प्रयास जारी है। विभाग में प्रयास, आस्था, निष्ठा, एकलव्य व अन्य कोचिंग संस्थाएं चल रही है, तो विभाग की विशेषकर आश्रम छात्रावासों के संचालन के प्रबंधन में भी इस प्रयास का असर दिखना चाहिए।

कमिश्नर चुरेन्द्र ने कहा कि आश्रम छात्रावासों के विद्यार्थियों का व्यक्तित्व विकास, क्षमता विकास, कौशल विकास, शारीरिक विकास आदि के द्वारा इन बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने हेतु तथा प्रकृति के संरक्षण में इनकी सहभागिता अभी से सुनिश्चित की जानी चाहिए।

योजनाबद्ध तरीके से कार्यवाही सुनिश्चित करें

इन बातों को ध्यान में रखकर संभाग के सभी जिलों में संचालित आश्रम छात्रावासों व आवासीय परिसरों को मॉडल संस्था के रूप में विकसित करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्यवाही सुनिश्चित करें।

इसके पीछे मूल मंशा यह भी है कि प्रत्येक विद्यार्थी को आत्मनिर्भर, स्वावलंबी बनाते हुए उन्हें बेहतर भविष्य प्रदान करना है। विद्यार्थी समाज व राष्ट्र का भविष्य है

और इसे बेहतर संवारने की हमारी जिम्मेदारी है। संभागायुक्त ने इसका गंभीरता व संवेदनशीलता से क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए आगामी 15 फरवरी पालन प्रतिवेदन प्रेषित करने के निर्देश दिए है।

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