बुलंदशहर: शहीद सिंह से बेटे ने की आखिरी बात, बोले- आज सगाई में जाना है

सोशल मीडिया में हिंसा के ढेरों विडियो उछाल दिए गए हैं

बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश का बुलंदशहर जिला जो स्याना में हुई घटना के बाद सुर्खियों में आ गया। गोकशी के शक में हिंसा भड़की और इस घटना में स्याना थाने के इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह समेत दो लोगों की मौत हो गई।

सोशल मीडिया में हिंसा के ढेरों विडियो उछाल दिए गए हैं। शहीद इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के छोटे बेटे अभिषेक प्रताप सिंह से बातचीत के दौरान

उन्होंने कहा कि अभी तक मां ने विडियो नहीं देखे हैं, यदि उनकी नजर इन पर पड़ती है तो वह बुरी तरह टूट जाएंगी। इतना ही नहीं, अभिषेक ने 2 दिसंबर और 3 दिसंबर को अपने पापा के साथ हुई आखिरी बातचीत का भी जिक्र किया।

हमें सगाई में जाना था, पापा घर आने वाले थे’

पिता के साथ हुई आखिरी बातचीत के बारे में अभिषेक ने बताया, ‘2 दिसंबर को हमारी विडियो कॉल हुई। उन्होंने मुझसे पूछा कि पढ़ाई-लिखाई कैसी चल रही है।

मां और भइया से भी बातचीत हुई थी। मेरा इकनॉमिक्स का तीन दिसंबर को पेपर था तो मैंने उनसे कहा कि मैं पढ़ाई करके सोने जाता हूं। फिर पापा ने मां से बताया कि 4 तारीख को एक दोस्त के बेटे की सगाई में जाना है।

शाम को पापा आने वाले थे। दरअसल, पापा का ट्रांसफर होता रहता है, जिसकी वजह से वह स्याना थाना में रहते थे। उम्र को देखते हुए रोज उन्हें आना-जाना थोड़ा मुश्किल हो जाता था,

इसके चलते वह वहीं रहने लगे। पापा के साथ हमारा पपी (पालतू कुत्ता) भी रहता था, उसे लेकर वह आने वाले थे। वह बता रहे थे कि कैसे पपी उन्हें चाटता रहता है, ऊपर आ जाता है…।’

3 दिसंबर को फोन पर आवाज आई- साहब को गोली लग गई है

घटना वाले दिन के बारे में अभिषेक बताते हैं, ‘मम्मी के दिन की शुरुआत पापा के फोन से ही होती थी। अगले दिन सुबह यानी 3 दिसंबर को पापा का सुबह मम्मी के पास तकरीबन साढ़े 9 बजे फोन आया, साढ़े 9 बजे तक बातचीत हुई।

इसके बाद जब मैं घर पहुंचा तो तकरीबन 1 बजकर 30 मिनट पर फोन आया कि साहब को चोट लग गई है आप आ जाइए। हमने कहा बताओ तो सही से, वहां से बताया गया कि साहब को गोली लगी है। हालत बहुत गंभीर है। मैंने स्कूल के कपड़े नहीं उतारे थे, तीन दिनों से घर में कोई सोया नहीं है।’

“मम्मी के दिन की शुरुआत पापा के फोन से ही होती थी। अगले दिन सुबह यानी 3 दिसंबर को पापा का सुबह मम्मी के पास तकरीबन साढ़े 9 बजे फोन आया, साढ़े 9 बजे तक बातचीत हुई।”

शहीद इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के परिवार में उनके दो बेटे हैं। श्रेय प्रताप सिंह और अभिषेक प्रताप सिंह। शहीद की पत्नी रजनी सिंह आज भी अपने पति को याद करते हुए कहती हैं कि वह दिलेर थे।

हिंसा में मारे गए इंस्पेक्टर के छोटे बेटे अभिषेक, पत्नी रजनी और बड़े भाई श्रेय ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहते हैं। वकील बनने की ख्वाहिश रखने वाले अभिषेक इंदिरापुरम के एक निजी स्कूल में 12वीं के छात्र हैं जबकि श्रेय यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं। सुबोध कुमार सिंह चाहते थे कि वह तो इंस्पेक्टर हैं लेकिन उनके बड़े बेटे श्रेय आईपीएस ऑफिसर बनें।

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