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सरकार और रेस्ट्रॉन्ट्स के बीच 6 प्रतिशत जीएसटी फायदे को असमंजस

नई दिल्ली: रेस्ट्रॉन्ट्स में खाना सस्ता होगा या नहीं अभी यह नहीं कहा जा सकता। एक ओर मंत्रियों के समूह ने 18 प्रतिशत जीएसटी को 6 प्रतिशत तक कमकर 12 प्रतिशत करने की सिफारिश की है वहीं, दूसरी ओर रेस्ट्रॉन्ट्स का कहना है कि जीएसटी कम होता है तो खाने का रेट बढ़ेगा।

संभावना है कि केंद्र सरकार समूह की सिफारिश को मान सकती है, जिससे रेस्ट्रॉन्ट्स में खाने पर लगने वाला जीएसटी कम हो जाएगा। समूह ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (6 प्रतिशत) की सुविधा हटाने का सुझाव दिया है जिसका फायदा अभी तक रेस्ट्रॉन्ट्स और कैफे ले रहे थे।

कन्ज्यूमर्स को मिले 6% फायदा

पांच राज्यों के वित्त मंत्रियों ने रविवार को एसी रेस्ट्रॉन्ट्स पर लगने वाले 18 प्रतिशत जीएसटी को कमकर 12 प्रतिशत करने का सुझाव दिया था। इस मामले पर अगले महीने होने वाली जीएसटी काउंसिल की मीटिंग पर चर्चा होगी। एक सूत्र ने बताया, ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट से होने वाला फायदा 6 प्रतिशत, जो कन्ज्यूमर्स तक पहुंचना चाहिए था।’

रेस्ट्रॉन्ट्स की लॉबिंग

इन खबरों के बीच रेस्ट्रॉन्ट्स की लॉबिंग भी शुरू हो गई है, जिनका कहना है कि जीएसटी कम होने पर उन्हें मजबूरन कीमतों को 6 से 8 प्रतिशत तक बढ़ाना पड़ेगा।

नैशनल रेस्ट्रॉन्ट असोसिएशन ऑफ इंडिया और फिक्की ने सरकार से लेवी को कम करने को कहा है और साथ ही इनपुट टैक्स क्रेडिट को बरकरार रखने की मांग की है। असोसिएशन के प्रेजिडेंट रियाज अमलानी ने कहा, ‘खाने पर बचने वाला पैसा 1 प्रतिशत के आसपास ही होता है। बार के लिए कोई इनपुट टैक्स क्रेडिट भी नहीं है।’

बढ़ेंगे रेट?

एनआरएआई के मुताबिक, फूड के रेट्स जीएसटी के लागू होने के बाद 100 रुपये से 99 रुपये हो गए। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि इनपुट पर मिलने वाला टैक्स, फर्निचर और रेस्ट्रॉन्ट के किराए के बाद प्राइस 94 रुपये के करीब होना चाहिए।

रेस्ट्रॉन्ट्स सरकार की इसी कैल्कुलेशन पर सवाल उठा रहे हैं। एनआरएआई का अनुमान है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट हटाने पर फूड का रेट 106 तक पहुंच सकता है।

दिल्ली में ‘सोशल’ चलाने वाले अमलानी ने कहा, ‘रेंट हर साल 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, खाद्य महंगाई 4 प्रतिशत के आसपास है और दिल्ली जैसी जगहों में लेबर कॉस्ट 30 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं।

शराब पर बैन और सर्विस चार्ज के नियमों के कारण यह साल रेस्ट्रॉन्ट्स के काफी खराब रहा है।’ एनआरएआई ने कहा कि सरकार की कैल्कुलेशन सही नहीं है क्योंकि अभी सभी रिटर्न फाइल नहीं हुए हैं।

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