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तेल का खेलः भारत आई यह कंपनी, मोदी की भी बड़ी बैठक

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रोजनेफ्ट, सऊदी अरामको, रिलायंस इंडस्ट्रीज और केन इंडिया समेत कई विदेशी और भारतीय कंपनियों के सीईओ के साथ सोमवार को हाई लेवल मीटिंग करेंगे।

सरकार एनर्जी सेक्टर में निवेश बढ़ाना चाहती है। मोदी रोजनेफ्ट के सीईओ इगोर सेचिन, बीपी के सीईओ बॉब डडली, सऊदी अरामको के सीईओ अमीन एच नसीर, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी, केन इंडिया के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, एक्सॉनमोबिल के प्रेजिडेंट रॉब फ्रेंकलिन और सरकारी ऑइल फर्मों के चेयरमैन के साथ बैठक करेंगे। इसकी पहल नीति आयोग ने की है।

बैठक के बाद इस सेक्टर में इन्वेस्टर सेंटीमेंट बदल सकता है और डीप सी गैस फील्ड डिवेलप करने के लिए बीपी और रिलायंस 6 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान कर सकते हैं।

अरामको भी भारत में निवेश करने में दिलचस्पी दिखा सकता है। दुनिया की सबसे बड़ी ऑइल एक्सपोर्ट कंपनी ने रविवार को गुड़गांव में अपने ऑफिस की आधिकारिक लॉन्चिंग भी कर दी।

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अरामको के सीईओ अमीन नसीर ने कंपनी के दफ्तर का शुभारंभ किया। प्रधान ने कंपनी के इस कदम को हाइड्रोकार्बन सेक्टर में खरीदार और आपूर्तिकर्ता के रिश्ते को दोनों देशों की रणनीतिक भागीदारी के स्तर पर ले जानेवाला बताया। कंपनी चीन से एक सीनियर एग्जिक्युटिव को भी भारत लाने की तैयारी में है।

भारत में एनर्जी की खपत बढ़ने की उम्मीद है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोलर और विंड एनर्जी जेनरेशन में भारत की तेज ग्रोथ से नैचरल गैस की मांग भी बढ़ेगी।

अधिकारियों का कहना है कि भारत में ऑइल और गैस सेक्टर में बड़े मौके हैं। रिलायंस और सरकारी कंपनी ओएनजीसी के द्वारा डीप सी डिवेलपमेंट से खासतौर पर गैस के लिहाज से समृद्ध साउथ-ईस्टर्न कोस्ट में ऑइलफील्ड सर्विसेज और इक्विपमेंट की मांग भी तैयार होगी।

सरकार की योजना मौजूदा ऑइलफील्ड्स का परफॉर्मेंस सुधारने के लिए प्राइवेट सेक्टर की मदद लेने की है, जिन्हें बिना किसी कॉम्पिटीशन के ओएनजीसी को दिया गया था।

बैठक में सरकार की तरफ से पेट्रोलियम और नैचरल गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार, कैबिनेट सेक्रटरी पी के सिन्हा और नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत शामिल होंगे।

इसमें अहम मंत्रालयों के सचिव भी मौजूद रहेंगे ताकि पॉलिसी और टैक्स से जुड़े सभी मुद्दों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा सके।

अहम नीति निर्माता विजय केलकर, आईएचएस मार्क के वाइस चेयरमैन डेनियल येर्जिन और इंटरनैशनल गैस यूनियन के प्रेजिडेंट डेविड सी कैरल भी बैठक में शिरकत करेंगे।

सख्त नियंत्रण, सब्सिडी और बड़े विवाद के कारण भारत के ऑइल ऐंड गैस सेक्टर को चोट पहुंची है।

हालांकि, हाल के वर्षों में भारत ने इस सेक्टर में इन्वेस्टर्स की सभी चिंताओं का व्यावहारिक तौर पर हल निकाला है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमत को नियंत्रण के दायरे से बाहर किया है, सब्सिडी में बड़े पैमाने पर कटौती की है।

 

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