टैक्स के केस में फंस सकते हैं ‘मर्सल’ के विजय

मुंबई: दक्षिण भारत में बनी फिल्म ‘मर्सल’ में जीएसटी के बारे में एक किरदार के बयान को लेकर पैदा किए गए विवाद के बीच टैक्स अधिकारी दुविधा में पड़ गए हैं कि फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले अभिनेता विजय पर कार्रवाई की जाए या नहीं और की जाए तो कब।

चीफ इनकम टैक्स कमिश्नर्स की एक कमिटी को कंपाउंड ऐप्लिकेशन के बारे में जल्द फैसला करना होगा। ऐसा ऐप्लिकेशन मुख्य तौर पर मुकदमे से बचने के लिए दिया जाता है।

तमिल अभिनेता विजय ने इसे तब फाइल किया था, जब टैक्स अधिकारियों ने कुछ साल पहले मारे गए एक छापे में 3 करोड़ रुपये बरामद किए थे। यह ऐप्लिकेशन कमेटी के पास पड़ा है, जो अब तक कोई निर्णय नहीं कर सकी है।

मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने इकनॉमिक को बताया, ‘इसी साल कमिटी की बैठक हुई थी, लेकिन विजय के कंपाउंडिंग ऐप्लिकेशन को स्वीकार करने पर कमेटी के मेंबर्स में एकराय नहीं थी।

कोई डेडलाइन तो नहीं है, लेकिन उन्हें फिर बैठक करनी होगी। अगर कमेटी चाहे तो कुछ महीनों के लिए निर्णय टाल भी सकती है। कंपाउंडिंग ऐप्लिकेशन पर कोई भी निर्णय सबूतों के आधार पर होता है।

इसके नतीजे पर ऐसे मामलों का असर नहीं पड़ना चाहिए, जिनका इससे कोई संबंध न हो। इस ऐप्लिकेशन पर आने वाला नतीजा विजय के लिए अहम है।’

दिवाली के मौके पर रिलीज की गई तमिल फिल्म, इसके हीरो और प्रॉडक्शन हाउस को बीजेपी नेताओं ने इसलिए निशाने पर ले लिया क्योंकि इसमें नोटबंदी और जीएसटी की आलोचना की गई है।

कुछ बीजेपी नेताओं का आरोप है कि इस फिल्म के जरिए राजनीतिक हमला किया गया और अभिव्यक्ति की आजादी का दुरुपयोग किया गया। वहीं पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने फिल्म का सपॉर्ट किया है।

यह साफ नहीं है कि टैक्स कमिटी ऐप्लिकेशन पर निर्णय करने के लिए मौजूदा विवाद के ठंडा पड़ने का इंतजार करेगी या नहीं।

रेड और टैक्स नोटिस की कार्रवाई हो तो संबंधित व्यक्ति या तो सेटलमेंट कमीशन (जिसके पास बकाया टैक्स पर ब्याज और जुर्माना माफ करने के साथ मुकदमा बंद करने का भी अधिकार होता है) के पास जा सकता है या टैक्स डिपार्टमेंट के निर्णय को कानूनी तौर पर चुनौती दे सकता है।

मुकदमे में फंस जाएंगे अभिनेता विजय?

हालांकि अगर विभाग प्रॉसिक्यूशन नोटिस दे दे तो व्यक्ति कंपाउंडिंग ऐप्लिकेशन दाखिल कर सकता है और इसे स्वीकार किए जाने पर अपना अपराध मान सकता है और फिर जुर्माने सहित टैक्स चुकाकर मामला बंद होने की उम्मीद कर सकता है।

वह चाहे तो मुकदमे के नोटिस को अदालत में चैलेंज भी कर सकता है। विजय कंपाउंडिंग ऐप्लिकेशन दे चुके हैं और टैक्स चुका चुके हैं।

उनसे पेनाल्टी चुकाने को कहा जाएगा, लेकिन इससे भी अहम सवाल विजय के सामने यह है कि कमिटी उनका आवेदन स्वीकार करेगी या नहीं या उसे खारिज कर उनके खिलाफ मुकदमे की राह बना देगी?

 

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