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बैंकों को 50 कम्पनियों के बैड लोन पर करीब 2,400 अरब रुपए का नुक्सान

बैंकों को 50 कम्पनियों के बैड लोन पर करीब 2,400 अरब रुपए का नुक्सान उठाना पड़ सकता है। क्रिसिल की एक रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है। इन 50 कम्पनियों में से धातु क्षेत्र की कम्पनियों पर इसमें से 30 प्रतिशत का कर्ज है। वहीं निर्माण क्षेत्र की कम्पनियों पर 25 प्रतिशत तथा बिजली पर 15 प्रतिशत का कर्ज है। बैंकिंग प्रणाली की कुल गैर-निष्पादित आस्तियां (एन.पी.ए.) 8 करोड़ रुपए थीं। इनमें से 50 प्रतिशत से अधिक का बकाया इन कम्पनियों पर है।

इस नुकसान को 4 श्रेणियों बांटा गया

मामूली यानी 25 प्रतिशत से कम, थोड़ा यानी 25 से 50 प्रतिशत, आक्रामक 50 से 75 प्रतिशत और गहरा यानी 75 प्रतिशत से अधिक में बांटा गया है। इनमें से 25 प्रतिशत कर्ज मामूली या थोड़े की श्रेणी में आता है।

वहीं एक तिहाई आक्रामक और करीब 40 प्रतिशत गहरे की श्रेणी में आता है। रेटिंग एजैंसी के मुख्य विश्लेषण अधिकारी पवन अग्रवाल ने कहा कि बिजली क्षेत्र की कम्पनियों के लिए मामूली या थोड़े कर्ज के दावे को छोड़ने की जरूरत होगी। वहीं धातु और निर्माण क्षेत्र की कम्पनियों के लिए आक्रामक तरीके से कर्ज का दावा छोड़ने की जरूरत होगी।

सार्वजनिक बैंकों को बढावा दिया जा रहा है

वित्त मंत्रालय सार्वजनिक बैंकों में पूंजी डालने की रणनीति पर काम कर रहा है और इस बारे में जल्द ही घोषणा की जाएगी। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बैंकों ने अपनी पूंजी जरूरतों के बारे में ज्ञापन सौंपे थे जिसके आधार पर इंद्रधनुष योजना के तहत पूंजी लगाने के सांचे को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

इंद्रधनुष योजना के तहत मौजूदा वित्त वर्ष में 10,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है लेकिन फंसे कर्ज के निपटान के लिए जरूरी प्रावधान को देखते हुए उक्त राशि कम पड़ सकती है। अधिकारियों ने कहा कि लाभान्वित होने वाले बैंकों की सूची जल्द ही घोषित होगी और बैंकों में यह धन पिछले साल की तरह किस्तों में लगाया जाएगा।

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