फिर बढ़ाया गया सांसदों का भत्ता, मंत्रिमंडल की मिली मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसद सदस्यों के भत्ते में बढ़ोत्तरी संबंधी प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। बुधवार को मिली रजामंदी के बाद सांसदों को अब बढ़े हुए भत्ते मिलना लगभग तय हो गया है।

सरकार के सूत्रों ने बताया कि सांसदों के निर्वाचन क्षेत्र भत्ते, फर्नीचर भत्ते एवं संपर्क खर्चो में खासा इजाफा होगा।

संसदीय मामलों के मंत्रालय का प्रस्ताव : संसदीय मामलों के मंत्रालय ने निर्वाचन क्षेत्र भत्ते को 45 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये करने का प्रस्ताव किया था। मंत्रालय ने एकमुश्त फर्नीचर भत्ते को वर्तमान के 75 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये करने का प्रस्ताव दिया था। वित्त मंत्री अरूण जेटली ने अपने बजट भाषण में घोषणा की थी कि सांसदों के वेतन की प्रत्येक पांच वर्ष के बाद समीक्षा के लिए एक स्थायी प्रणाली बनाई जाएगी।

54 हजार रुपये का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता : सांसदों को 50 हजार रुपये का मूल वेतन और 54 हजार रुपये का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता तथा अन्य भत्ते मिलते हैं। केंद्र एक सांसद पर प्रति माह करीब 2.7 लाख रुपये व्यय करता है।

लोकसभा में अध्यक्ष को छोड़कर 536 सांसद हैं जिनमें दो एंग्लो इंडियन समुदाय के मनोनीत सदस्य शामिल हैं। आठ सीटें रिक्त हैं। राज्यसभा में 239 सदस्य हैं।

6 साल में सांसदों का वेतन 4 गुना : इससे पहले बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने 24 जनवरी को कहा कि सांसदों के वेतन में पिछले छह साल में चार गुना इजाफा हुआ है जबकि पहले की तुलना में संसद की कार्यवाही की अवधि घट गई है।

जयपुर में एक निजी कालेज में एक कार्यक्रम में वरुण ने सवाल किया कि क्या कोई आदमी अपने मन से अपनी तनख्वाह बढ़ा सकता है या खुद ही इसे तय कर सकता है, अगर नहीं तो सांसद और विधायक अपनी तनख्वाह कैसे तय कर सकते हैं ? उन्होंने कहा कि सांसदों की तनख्वाह पिछले छह साल में चार गुना तक बढ़ी है।

वरुण ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि नेताओं की पत्नियों, बेटियों, बहनों को संसद में लाने की बजाय सामान्य महिलाओं, चिकित्सकों, गरीब महिलाओं, अध्यापकों और वकीलों को आगे बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।

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