सिक्कों से भी जीवन को बदल सकते हैं?( सिक्के / लाकेट / ताबीज)

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव

सिक्के व सिक्कों के आकार के लाकेट (जिनमें कुछ यंत्रों की आकृति होती है) को बतौर ताबीज धारण करने/रखने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यंत्रों, रुद्राक्ष व रत्नों के लाकेट गले में पहनने के लिए होते हैं। योगियों के अनुसार लाकेट का सकारात्मक हृदय चक्र को सक्रिय करता है। जब हम गले में लाकेट पहनते हैं तो यह ढाल बनकर हमारी काला जादू, बुरी आत्माओं, भूत प्रेत व ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव से रक्षा करता है।

फेंगशुई सामग्री

फेंगशुई का अर्थ है वायु व जल। प्राचीनकाल से ये दोनों जल व वायु दो बड़ी शक्तियां मानी जाती रही है। यही ऊर्जा व्यक्ति के स्वास्थ, प्रगति व सौभाग्य के लिए ज़िम्मेदार होती हैं। फेंगशुई सामग्री हमारे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह की बेहतरी का दावा करती है।

रंग चिकित्सा

रंग चिकित्सा हमारे शरीर के ऊर्जा चक्रों को संतुलित करती है और उसमें वृद्धि करती है। यह हमारे शरीर के स्वतः स्वस्थ होने की क्षमता को प्रेरित करती है। रंग चिकित्सा रंगों के प्रयोग से चक्रों के ऊर्जा केंद्रों को पुनः संतुलित करती है।

लाल किताब

ज्योतिष की चमत्कारिक पुस्तक लाल किताब में कुछ विलक्षण उपायों का उल्लेख है। ये उपाय सस्ते हैं व एक आम आदमी की पहुंच में हैं तथा आसानी से किए जा सकते हैं।

यज्ञ

इस समग्र सृष्टि के क्रिया कलाप ‘यज्ञ’ रूपी धुरी के चारों ओर ही चल रहे हैं। प्राचीन धर्म शास्त्रों में ऋषियों ने ‘‘अयं यज्ञो विश्वस्य नाभिः’’ (अथर्ववेद 9, 15, 14) कहकर यज्ञ को भुवन की इस सृष्टि का आधार बिंदु कहा है। स्वयं गीताकार योगिराज श्रीकृष्ण ने कहा है।

प्राणायाम

हमारे ऋषियों ने जीवन-भर तपस्या के फल स्वरूप, संसार में वास्तविक सुख और शांति लाने के लिए योग विज्ञान का निर्माण किया था। योग साधना में प्राणायाम सर्वश्रेष्ठ है। कहा जाता है कि आत्मा और परमात्मा के मिलन का नाम योग है।

प्राणायाम सांस को लेने और छोड़ने की प्रक्रिया है। प्रायः हम शरीर के रोगों का इलाज औषधियों द्वारा करते हैं। परंतु यह देखा गया है कि रोग, मात्र इन औषधियों से नष्ट नहीं होते। योग और प्राणायाम के अभ्यास से हम इन शारीरिक रोगों से मुक्त हो सकते हैं। प्राणायाम के निरंतर अभ्यास से विचार केंद्रित होते हैं और इस से प्राप्त शक्ति मनुष्य के जीवन के लिए लाभदायक सिद्ध होती है। प्राणायाम को सर्वश्रेष्ठ तप की संज्ञा भी दी गई है तथा इसकी साधना से पापों का नाश होता है तथा ईश्वर की प्राप्ति होती र्है। प्राणायाम से कुंडलनी शक्ति को भी जागृत किया जा सकता है।

देव दर्शन

देव दर्शन अर्थात् तीर्थ स्थल की यात्रा को सभी धर्मों में शुभ माना गया है। अलग-अलग लोगों को अलग-अलग मंदिरों में आस्था होती है। इसलिए वह लोग अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए मंदिरों की यात्रा करने में विश्वास रखते हैं।

व्रत

व्रत एक अटल निश्चय है जब तक मनुष्य कोई व्रत नहीं करता तब तक उसका मन इधर-उधर भटकता है अर्थात एकाग्र नहीं हो पाता योग साधना के अनुसार भी यम और नियम पर बल दिया जाता है और ये दोनों ही व्रत हैं। व्रत धारी के मन में यह पूर्ण निश्चय होना ही चाहिए कि यदि इससे मेरी कोई तात्कालिक हानि हो रही हो तब भी में अपना व्रत भंग नहीं करुंगा।

भारतीय हिंदू संस्कृति में व्रत व पर्वों का अधिकाधिक महत्व रहा है। वास्तव में व्रत करना व रखना भी एक तप के समान ही है, हमारे पौराणिक धर्म गं्रथों व हिंदू शास्त्रों में व्रतों की अत्यधिक महिमा बताई गई है, इसलिए व्रतों को समस्या निवारण का एक अचूक उपाय माना जाता है। इन व्रतों में एकादशी, महाशिव रात्रि, नवरात्र, वट सावित्री, करवाचैथ, पूर्णिमा आदि को श्रेष्ठ माना जाता है।

औषधि स्नान

आयुर्वेद के अनुसार आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का प्रयोग कर औषधि स्नान से स्वास्थ्य में सुधार होता है।

जल विसर्जन

फूल, दीपक या देवी देवता की मूर्तियों के द्वारा ईश्वर का विशेष आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विसर्जित किया जाता है।

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