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घृणा अपराध सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी, धर्म के नाम पर हत्या को जायज नहीं ठहराया जा सकता

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने घृणा अपराध पर सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि धर्म के नाम पर हमला या हत्या को जायज़ नहीं ठहराया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने सभी अदालतों से भी कहा है कि वे अपने आदेश मे ऐसी कोई टिप्पणियां न करें जो किसी समुदाय के पक्ष में या किसी के खिलाफ प्रतीत हो.

सुप्रीम कोर्ट ने पुणे के एक मामले में अभियुक्तों को जमानत देने का हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए मामला दोबारा विचार के लिए हाईकोर्ट वापस भेज दिया. कोर्ट ने कहा कि मामलों पर सुनवाई करते समय अदालत को देश के बहुलतावादी समाज का ध्यान रखना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने हो सकता है कि अपराध के पीछे अभियुक्तों का निजी दुश्मनी न होना, बल्कि धार्मिक नफरत होने की बात दर्ज करते हुए ये कहा हो. जज का किसी समुदाय की भावनाएं आहत करने का इरादा नहीं होगा, लेकिन टिप्पणी आलोचनाओं को बल देती है.

हाईकोर्ट ने हत्या के अभियुक्तों को जमानत देते हुए अपने आदेश में कहा था कि अभियुक्तों की मृतक से कोई निजी दुश्मनी नही थी. मृतक का कुसूर सिर्फ इतना था वह दूसरे धर्म का था.

महाराष्ट्र के पुणे में 2 जून 2014 के एक हत्या के मामले में आरोपियों की जमानत रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में यह कहा.

इससे पहले साल 2014 में मोहसिन शेख की पुणे में हिंदू राष्ट्र सेना के सदस्यों द्वारा कथित तौर पर हत्या के मामले 3 आरोपियों की जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया था.

हत्या के तीन आरोपी विजय राजेंद्र गंभीर, गणेश उर्फ रंजीत शंकर यादव और अजीत दिलीप लागले को अदालत ने जमानत दे दी थी. मोहसिन के परिवार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

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