कावेरी के पानी की मात्रा में कटौती निराशाजनक : पलानीस्वामी

कोयंबटूर : तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने तमिलनाडु को छोड़े जाने वाले कावेरी के पानी की मात्रा में कटौती करने वाले उच्चतम न्यायालय के फैसले पर शनिवार को निराशा जताई. हालांकि, उन्होंने कहा कि फैसले के कुछ बिंदुओं का स्वागत किया जाना चाहिये. अंतरराज्यीय नदी के पानी पर किसी भी राज्य का ‘अनन्य स्वामित्व’ नहीं होने की बात करते हुए उच्चतम न्यायालय ने दशकों पुराने विवाद को सुलझाने की खातिर कल अपने फैसले में कावेरी नदी के पानी में कर्नाटक के हिस्से में 14.75 टीएमसीएफटी की वृद्धि कर दी और तमिलनाडु के हिस्से में से उतनी ही कटौती कर दी. इस फैसले को संतुलित बताया जा रहा है.

न्यायालय ने हालांकि तमिलनाडु को हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए उसे नदी बेसिन से 10 टीएमसीएफटी निकालने की अनुमति दे दी. पलानीस्वामी ने आज कहा कि कावेरी जल न्यायाधिकरण ने तमिलनाडु को 192 टीएमसीएफटी पानी का आवंटन किया था और फैसले में उसके हिस्से में 14.75 टीएमसीएफटी की कटौती और राज्य को 177.25 टीएमसीएफटी आवंटित करना ‘निराशाजनक’ है.

उन्होंने यहां हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से कहा कि कुछ बिंदुओं का स्वागत किया जाना चाहिये. उन्होंने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के फैसले पर और टिप्पणी नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि न्यायालय ने सिंचाई के तहत तमिलनाडु के रकबे की पुष्टि कर दी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य के नदी पर स्वामित्व का दावा नहीं कर सकने के बारे में न्यायालय की टिप्पणी स्वागत योग्य है.

भावी कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि विधि विशेषज्ञों के साथ बातचीत के बाद इसपर फैसला किया जाएगा. पलानीस्वामी ने कहा कि यह फैसला उच्चतम न्यायालय में पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता द्वारा दायर याचिका पर आया है. उन्होंने इस बात का भी विश्वास जताया कि केंद्र न्यायालय के सुझाव के अनुसार कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड का छह हफ्ते के भीतर गठन करेगा. यह राज्य की काफी पुरानी मांग है.

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