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दिल्ली हाईकोर्ट में ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन के खिलाफ कैविएट दाखिल

अमेजन की ओर से कानूनी विवाद उठाये जाने के संदर्भ में दाखिल दर्ज

नई दिल्ली: किशोर बियानी के नेतृत्व वाले फ्यूचर समूह ने दिल्ली उच्च न्यायालय में केवियट याचिका दायर की है। समूह ने यह याचिका रिलायंस के साथ उसके 24,713 करोड़ रुपये के सौदे पर अमेजन की ओर से कानूनी विवाद उठाये जाने के संदर्भ में दर्ज की है।

केवियट याचिका उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में किसी वादी द्वारा उसका पक्ष सुने बिना किसी भी तरह का फैसला आने से रोकने के लिए दायर की जाती है। फ्यूचर समूह ने कैविएट की एक कॉपी अमेजन को भी भेज दी है।

इसमें अमेजन से कहा गया है कि मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम की धारा-9 के तहत प्रस्तावित प्रतिवादी/कैविएटर के खिलाफ कोई भी याचिका दाखिल करने से कम-से-कम 48 घंटे पहले नोटिस दिया जाए। अमेजन ने इस मामले में कोई भी टिप्पणी से इनकार कर दिया।

पिछले दिनों सिंगापुर की अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र ने अमेजन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए रिलायंस-फ्यूचर समूह के सौदे पर रोक लगा दी थी। इसके बाद किशोर बियानी के नेतृत्व वाले समूह ने कहा था कि वह इस फैसले को मानने के लिए बाध्य नहीं है। ऐसे में मध्यस्थता केंद्र के फैसले को लागू कराने के लिए अमेजन दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। अमेजन के इस रुख को भांपते हुए फ्यूचर समूह ने कैविएट दाखिल किया है।

भारत के पास वोडाफोन के खिलाफ अपील करने का दिसंबर तक मौका भारत सरकार के पास वोडाफोन के 22,100 करोड़ रुपये के रेट्रोस्पेक्टिव कर मामले में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक का समय है।

अदालत ने भारत सरकार के खिलाफ अपने फैसले में कहा था कि भारतीय आयकर विभाग ने ‘निष्पक्ष और बराबरी’ से काम नहीं किया है। मामले में वित्त सचिव अजय भूषण पांडे ने कहा कि सरकार फैसले के खिलाफ अपील करने से पहले सभी पहलुओं पर विचार कर रही है।

उन्होंने पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली के उस वादे पर कुछ कहने से इनकार किया कि पिछली तिथि से जुड़े मामलों में सरकार मध्यस्थता मंचों के फैसलों का सम्मान करेगी। अपील करने की समय-सीमा के सवाल पर पांडे ने कहा कि प्रत्येक मध्यस्थता आदेश में अपील करने के लिए 90 दिनों का समय होता है। इसलिए हमारे पास निर्णय लेने के लिए समय है। हम उचित समय पर निर्णय लेंगे।

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