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CBI रिश्वत मामला: राकेश अस्‍थाना को मिली HC से बड़ी राहत

नई दिल्ली:

सीबीआई में दूसरे नंबर की हैसियत रखने वाले विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने सीबीआई को यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया है। साथ ही, अस्थाना को अंतरिम राहत देते हुए एफआईआर दर्ज होने के बाद सोमवार (29 अक्टूबर) तक उनकी संभावित गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने गैरजमानती वारंट जारी करने पर भी रोक लगा दी है।

क्या है मामला

सीबीआई ने अपने स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज कराई है। इस एफआईआर में अस्थाना पर मीट कारोबारी मोइन कुरैशी के मामले में जांच के घेरे में चल रहे एक कारोबारी सतीश सना से दो करोड़ रुपए की रिश्वत लेने का आरोप है। सीबीआई में नंबर दो की हैसियत रखने वाले राकेश अस्थाना इस जांच के लिए बनाई गई एसआईटी के प्रमुख हैं। कारोबारी सतीश सना का आरोप है कि सीबीआई जांच से बचाने के लिए राकेश अस्थाना ने दिसंबर 2017 से अगले दस महीने तक उससे करीब दो करोड़ रुपए की रिश्वत ली।

कौन हैं राकेश अस्थाना

राकेश अस्थाना 1984 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस हैं। पहली बार 1996 में चर्चा में आए, जब उन्होंने चारा घोटाला मामले में लालू यादव को गिरफ्तार किया। 2002 में गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आगजनी की जांच के लिए गठित एसआईटी का नेतृत्व भी राकेश अस्थाना ने किया।
अहमदाबाद ब्लास्ट और आसाराम केस की जांच भी इन्होंने ही की। 2017 अक्टूबर को पीएमओ के निर्देश पर सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर नियुक्त हुए।
इससे पहले वह अतिरिक्त निदेशक के पद पर काम कर चुके हैं। ये वडोदरा और सूरत के पुलिस कमिश्नर भी रह चुके हैं और इन्हें बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का करीबी भी माना जाता है।

कौन है मोइन कुरैशी

मांस कारोबारी कुरैशी का पूरा नाम मोइन अख्तर कुरैशी है। दून में स्कूल में पढ़ाई करने वाले मोइन के बारे में कहा जाता है कि उसके राजनीतिज्ञों से अच्छे संबंध रहे हैं। किसी समय उत्तर प्रदेश के रामपुर में छोटा-सा बूचड़खाना चलाने वाले कुरैशी की गिनती अब अरबपति कारोबारियों में होती है। उसकी देश-विदेश में कई कंपनियां हैं।

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