राष्ट्रीय

सीबीआई विवाद : सीवीसी और सीबीआई के लिए कोई दिवाली नहीं- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने जांच का काम दो हफ्ते में पूरा करने का निर्देश दिया

नई दिल्ली :

सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा के खिलाफ जारी सीवीसी की जांच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एके पटनायक की निगरानी के निर्देश मे यह साफ किया कि उसका यह निर्णय सरकार के किसी संस्था के कामकाज पर सवालिया निशान खड़ा करना कतई नहीं है।

वास्तव में सुनवाई के दौरान सीवीसी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ से कहा कि अदालत को सीवीसी की जांच किसी की निगरानी में नहीं करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सीवीसी की वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजी जाती है और इसे संसद के समक्ष रखा जाता है।

इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि इस मामले के अनूठे साक्ष्यों के मद्देनजर हमने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की निगरानी में सीवीसी जांच कराने का निर्णय लिया है। इस निर्णय का मतलब सरकार के किसी संस्था पर सवालिया निशान लगाना कतई नहीं है।’

पीठ ने जस्टिस पटनायक से जिम्मेदारी संभालने का आग्रह करते हुए यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि जांच निर्धारित समय में पूरी हो जाए। वहीं सुनवाई के दौरान आलोक वर्मा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील फली एस नरीमन ने पीठ से कहा कि सीबीआई निदेशक को कार्यकाल दो वर्ष के लिए निर्धारित होता है।

निदेशक की नियुक्ति उच्चाधिकार कमेटी करती है और इस कमेटी में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत केप्रधान न्यायाधीश होते हैं लेकिन आलोक वर्मा से निदेशक का कामकाज बिना इस कमेटी की अनुमति के लिए गया।

इस पर पीठ ने कहा हम इस पर परीक्षण करेंगे। वहीं केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पीठ ने समक्ष अपनी दलील पेश करनी शुरू की थी कि चीफ जस्टिस ने उन्हें रोकते हुए कहा कि आप अपना समय नष्ट नहीं कीजिए, हमने तय कर लिया है कि हमें क्या करना है।

सुनवाई के दौरान पीठ सीवीसी को जांच को काम पूरा करने के लिए 10 दिन देने के पक्ष में थी लेकिन सीवीसी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जांच के लिए और वक्त देने की गुहार की लेकिन पीठ ने इसे ठुकरा दिया। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने जांच का काम दो हफ्ते में पूरा करने का निर्देश दिया।

वरिष्ठ वकील फली एस नरीमन(आलोक वर्मा के वकील): सीबीआई निदेशक का कार्यकाल दो वर्ष का होता है। कार्यकाल में किसी तरह का छेड़छाड़, चाहे वह अच्छे या बुरे कारणों से हो तो तो इसके लिए प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस वाली उच्चाधिकार कमेटी की अनुमति से होनी चाहिए।

चीफ जस्टिस: हम इसका परीक्षण करेंगे।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता(सीवीसी के वकील): सीवीसी को किसी की निगरानी में जांच करने का निर्देश नहीं दिया जाना चाहिए।

चीफ जस्टिस: मामले के अनूठे साक्ष्यों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है और इसे अपवाद केतौर पर देखा जाए।

सॉलिसिटिर जनरल: जांच के लिए दस दिनों का वक्त पर्याप्त नहीं है। अदालत में दिवाली की छुट्टियां हैं।

चीफ जस्टिस: ओके। ठीक है 240 घंटे। अधिक वक्त देना देश के हित में नहीं होगा। अदालत में दिवाली की छुट्टी होने से सीवीसी जांच का क्या वास्ता है। दिवाली तो कुछ घंटे के लिए हैं। सीवीसी और सीबीआई के लिए कोई दिवाली नहीं।

वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी(राकेश अस्थाना के वकील): हमें भी सुना जाए। मेरे मुवक्किल ने भी छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ याचिका दायर की है।

चीफ जस्टिस: लेकिन आप की फाइल हमारे पास नहीं हैं, ऐसे में हम कैसे सुनवाई कर सकते हैं।

रोहतगी: हमारी याचिका पर सोमवार को सुनवाई की जाए।

चीफ जस्टिस: हम देखेंगे।

Summary
Review Date
Reviewed Item
सीबीआई विवाद : सीवीसी और सीबीआई के लिए कोई दिवाली नहीं- सुप्रीम कोर्ट
Author Rating
51star1star1star1star1star
Tags
advt