लालू प्रसाद को जमानत दिए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी सीबीआई

सीबीआई के अनुसार लालू प्रसाद को चार मामले में अलग-अलग सजा हुई

नई दिल्ली: झारखंड हाई कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव को जमानत प्रदान की है। अदालत ने दुमका कोषागर मामले में आधी सजा पूरी करने के आधार पर लालू प्रसाद यादव को शनिवार को जमानत दी। लालू को जेल से बाहर आने के लिए ₹100000 के निजी मुचलके का बांड निचली अदालत में भरना होगा।

वहीँ लालू प्रसाद के जमानत दिए जाने के खिलाफ सीबीआई सुप्रीम कोर्ट जाएगी। सीबीआई ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है और जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगी। लालू प्रसाद के सीआरपीसी की धारा 427 को आधार बनाते हुए सीबीआई सुप्रीम कोर्ट से लालू प्रसाद की जमानत रद्द करने का आग्रह करेगी।

सीबीआई के अनुसार लालू प्रसाद को चार मामले में अलग-अलग सजा हुई है। लेकिन सीबीआई कोर्ट ने सभी सजा एक साथ चलाने का आदेश नहीं दिया है। इस कारण सभी सजा एक साथ नहीं चल सकती।

सीआरपीसी की धारा 427 में प्रावधान के अनुसार किसी व्यक्ति को एक से अधिक मामलों में दोषी करार देकर सजा सुनायी जाती है और अदालत सभी सजा एक साथ चलाने का आदेश नहीं देती है, तो उस व्यक्ति की एक सजा की अवधि समाप्त होने के बाद ही उसकी दूसरी सजा शुरू होगी।

चारा घोटाले के चार मामलों में लालू प्रसाद को दोषी करार देते हुए सजा सुनायी गई है। किसी भी आदेश में सभी सजा एक साथ चलाने का उल्लेख नहीं किया गया है।इस कारण लालू प्रसाद पर यह धारा लागू होती है और जब तक एक सजा की पूरी अवधि वह हिरासत में व्यतीत नहीं कर लेते, दूसरी सजा लागू नहीं हो सकती।

इस आधार पर लालू प्रसाद की यह दलील की उन्होंने आधी सजा काट ली है, सही नहीं है और उन्हें दी गई जमानत रद्द कर देनी चाहिए। सीबीआई के अनुसार लालू प्रसाद की ओर से अभी तक अदालत से सभी सजा एक साथ चलाने के लिए कोई आवेदन नहीं दिया गया है। ऐसे में सीआरपीसी की धारा 427 के तहत उन्हें जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

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