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अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन को लेकर वाशिंगटन में भी मनाया जा रहा जश्न

बीजेपी, कांग्रेस, सपा, टीएमसी सहित तमाम दलों के नेता दे रहे बयान

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में 28 साल बाद पहुंचे हैं. वह एक साथ तीन रेकॉर्ड बनाने जा रहे हैं. वह श्रीराम जन्मभूमि जाने वाले प्रथम प्रधानमंत्री बने हैं. यह देश में पहला मौका होगा, जब प्रधानमंत्री ने अयोध्या की हनुमानगढ़ी का दर्शन किया.

वाही राम मंदिर भूमि पूजन को लेकर तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. इसमें बीजेपी, कांग्रेस, सपा, टीएमसी सहित तमाम दलों के नेता बयान दे रहे हैं. इस सबमें राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख पुरोधा लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी इस कार्यक्रम में नहीं पहुंच रहे हैं. हालांकि आडवाणी की ओर से एक संदेश जरूर जारी किया गया है.

उन्होंने कहा कि राम मंदिर एक एक शांतिपूर्ण सौहार्दपूर्ण राष्ट्र के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व करेगा जहां सबके लिए न्याय होगा और कोई भी बहिष्कृत नहीं होगा, ताकि देश ‘राम राज्य’ की ओर अग्रसर हो, जो ‘सुशासन का प्रतिमान’ है.

अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में भारतीय समुदाय के लोगों ने जश्न मनाया है.

500 सालों से चल रहा यज्ञ आज समाप्त होगा : शिवराज सिंह चौहान

पीएम मोदी आज राम मंदिर की आधारशिला रखेंगे. महायज्ञ जो 500 साल पहले शुरू हुआ था आज समाप्त हो जाएगा. उनकी दृढ़इच्छा शक्ति ने उनको बड़ा नेता बना दिया है.

उमा भारती पहुंची अयोध्या

मंदिर आंदोलन की प्रमुख चेहरा रहीं उमा भारती ने कहा कि अयोध्या ने सभी को एक कर दिया है. अब यह देश पूरी दुनिया में माथा ऊंचा कर कह सकेगा कि यहां किसी के साथ भेदभाव नहीं है.

योग गुरू रामदेव ने क्या कहा-

यह भारत का सौभाग्य है. हम लोग भी इसके गवाह बन रहे हैं. देश में रामराज्य की स्थापना हो रही है.

अखिलेश यादव ने कहा- जय सिया राम

सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा, जय महादेव जय सिया-राम… जय राधे-कृष्ण जय हनुमान भगवान शिव के कल्याण, श्रीराम के अभयत्व व श्रीकृष्ण के उन्मुक्त भाव से सब परिपूर्ण रहें! आशा है वर्तमान व भविष्य की पीढ़ियां भी मर्यादा पुरूषोत्तम के दिखाए मार्ग के अनुरूप सच्चे मन से सबकी भलाई व शांति के लिए मर्यादा का पालन करेंगी.

प्रियंका गांधी ने क्या कहा

सरलता, साहस, संयम, त्याग, वचनवद्धता, दीनबंधु राम नाम का सार है। राम सबमें हैं, राम सबके साथ हैं. भगवान राम और माता सीता के संदेश और उनकी कृपा के साथ रामलला के मंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बने.

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