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केंद्र: दिल्ली सरकार मेट्रो चलाने से पहले डीटीसी का हाल भी देख

दिल्ली: केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक पत्र लिखते हुए कहा है कि अगर दिल्ली सरकार चाहती है कि वह मेट्रो चलाए तो वह उसे नई नीति के तहत मेट्रो के फेज-4 का परिचालन देने को तैयार है. लेकिन वह चाहती है कि मेट्रो का परिचालन मांगने वाली दिल्ली सरकार पहले डीटीसी के परिचालन को भी देख ले.

दिल्ली सरकार की ओर से भेजे गए तीन प्रस्तावों— मेट्रो को दिल्ली सरकार को सौंपने, इसे 50:50 प्रतिशत चलाने और किराया नहीं बढ़ाने को सिरे से खारिज करते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि यह मेट्रो के नियम और संविधान के प्रतिकूल और असंवैधानिक है.

उन्होंने दिल्ली सरकार को कहा है कि इस मामले पर राजनीति करने से बेहतर है कि दिल्ली की बेहतरी के लिए कार्य किया जाए. जब दोनों सरकारें एक साथ कार्य करेगी तो परिवहन व्यवस्था और बेहतर होगी.
पुरी ने कहा है कि इस मामले में उन्होंने केंद्रीय शहरी विकास सचिव दुर्गाशंकर मिश्रा को कहा है कि वह मेट्रो बोर्ड की बैठक बुलाएं और चर्चा करें. उन्होंने कहा कि हालांकि यह भी नियमों में शामिल नहीं है कि इस मामले पर बोर्ड बैठक बुलाई जाए.

लेकिन अरविंद केजरीवाल क्योंकि दिल्ली के चुने हुए मुख्यमंत्री हैं इसलिए उन्होंने मेट्रो बोर्ड की बैठक बुलाने को कहा है. जहां तक दिल्ली सरकार की ओर से कोलकाता मेट्रो की वित्तीय व्यवस्था का हवाला दिया गया तो वह यह साफ करना चाहते हैं कि वहां समस्त खर्च रेलवे करता है और कोलकाता मेट्रो भारी घाटे में चल रही है.
लंबी दूरी की यात्रा से मिलता है राजस्व

किराया बढ़ाने पर दिल्ली सरकार को घेरते हुए

उन्होंने कहा है कि इस मामले में देरी पूर्व में दिल्ली सरकार की ओर से की गई है. जहां तक छोटी यात्रा का सवाल है, मेट्रो कभी भी एक या दो स्टेशन या छोटी यात्रा को उत्साहित नहीं करता है.वह चाहता है कि लंबी दूरी के लिए इसका उपयोग हो जिससे इसकी परिचालन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव न हो. इसका एक बड़ा खर्च उसे किराया से मिलता रहे.

उन्होंने दिल्ली सरकार को सलाह देते हुए कहा है कि परिवहन के मसले पर दोनों सरकार को मिलकर कार्य करना चाहिए जिससे जनता को इसका लाभ मिल पाए. अरविंद केजरीवाल को यह हरदीप सिंह पुरी का दूसरा पत्र है. इससे पहले भी वह एक पत्र लिखकर दिल्ली सरकार को यह बता चुके हैं कि किराया बढ़ाने के मामले में हस्तक्षेप करना नियमों के विरुद्ध है और दिल्ली या केंद्र सरकार ऐसा नहीं कर सकती.

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डीटीसी का हाल
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