केंद्र ने 17 राज्यों को राजस्व घाटा पूर्ति के लिए 9,871 करोड़ रुपये की अनुदान राशि की जारी

इस महीने अनुदान प्राप्त राज्यों और 2021-22 के दौरान राज्यों को जारी होने वाली पीडीआरडी अनुदान का ब्योरा काफी उल्लेखनीय है।

delhi: वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने निर्धारित धनराशि हस्तांतरित करने के बाद होने वाले राजस्व घाटे (पीडीआरडी) को पूरा करने के लिये राज्यों को 9,871 करोड़ रुपये की चौथी किस्त जारी कर दी है। इस किस्त के जारी होने के साथ मौजूदा वित्त वर्ष में पीडीआरडी के तौर पर पात्र राज्यों को कुल 39,484 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की जा चुकी है। इस महीने अनुदान प्राप्त राज्यों और 2021-22 के दौरान राज्यों को जारी होने वाली पीडीआरडी अनुदान का ब्योरा काफी उल्लेखनीय है।

किस अनुच्छेद के तहत दिया जाता है अनुदान

राज्यों को संविधान के अनुच्छेद 275 के तहत पीडीआरडी अनुदान प्रदान किया जाता है। पंद्रहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार राज्यों को मासिक किस्त के तौर पर अनुदान दिया जाता है, ताकि राज्यों की आय और व्यय के बीच के अंतराल को पूरा किया जा सके। आयोग ने सिफारिश की थी कि 2021-22 के दौरान 17 राज्यों को पीडीआरडी अनुदान दिया जाये।

अनुदान देने का फैसला कौन करता है

यह अनुदान प्राप्त करने के लिये कौन से राज्य पात्र हैं, इसका फैसला वित्त आयोग करता है। वह राज्यों की आय और खर्च के अंतराल को आधार बनाकर फैसला करता है। वित्त आयोग ने वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 17 राज्यों को पीडीआरडी अनुदान के रूप में 1,18,452 करोड़ रुपये जारी करने की सिफारिश की थी। इस धनराशि में से अब तक चार किस्तों के तौर पर कुल 39,484 करोड़ रुपये (33.33 प्रतिशत) की रकम जारी की गई है।

क्या होता है वित्त आयोग

संविधान के अनुच्छेद 280 के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया है कि संविधान के प्रारंभ से दो वर्ष के भीतर और उसके बाद प्रत्येक पांच वर्ष की समाप्ति पर या पहले उस समय पर, जिसे राष्ट्रपति द्वारा आवश्यक समझा जाता है, एक वित्त आयोग का गठन किया जाएगा। इस व्यवस्था को देखते हुए पिछले वित्त आयोग के गठन की तारीख के पांच वर्षों के भीतर अगले वित्त आयोग का गठन हो जाता है, जो एक अर्द्धन्यायिक एवं सलाहकारी निकाय है।

वित्त आयोग के कार्य

भारत के राष्ट्रपति को यह सिफारिश करना कि संघ एवं राज्यों के बीच करों की शुद्ध प्राप्तियों को कैसे वितरित किया जाए एवं राज्यों के बीच ऐसे आगमों का आवंटन कैसे किया जाए। वित्ती आयोग ही निर्णय लेता है कि अनुच्छेद 275 के तहत संचित निधि में से राज्यों को अनुदान/सहायता दिया जाना चाहिये या नहीं। राज्य वित्त आयोग द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर पंचायतों एवं नगरपालिकाओं के संसाधनों की आपूर्ति हेतु राज्य की संचित निधि में संवर्द्धन के लिये आवश्यक कदम उठाते हैं। राष्ट्रपति द्वारा प्रदत्त अन्य कोई विशिष्ट निर्देश, जो देश के वित्त हित में हो, ऐसे निर्देशों का पालन वित्त आयोग करता है।

वित्त आयोग की शक्तियां

आयोग अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाता है। प्रस्तुत सिफारिशों के साथ स्पष्टीकारक ज्ञापन भी रखवाना होता है ताकि प्रत्येक सिफारिश के संबंध में हुई कार्यवाही की जानकारी हो सके। वित्त आयोग द्वारा की गई सिफारिशें सलाहकारी प्रवृत्ति की होती हैं, उन्हें मानना या न मानना सरकार पर निर्भर करता है।

इन राज्यों को मिलेगा अनुदान

पंद्रहवें वित्त आयोग ने पीडीआरडी अनुदान के लिये जिन राज्यों की सिफारिश की थी, उनमें आंध्रप्रदेश, असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

किस राज्य को कितना दिया जाएगा अनुदान

राज्य रुपए करोड़ में

आंध्रप्रदेश 1438.08
असम 531.33
हरियाणा 11.00
हिमाचल प्रदेश 854.08
कर्नाटक 135.92
केरल 1657.58
मणिपुर 210.33
मेघालय 106.58
मिजोरम 149.17
नगालैंड 379.75
पंजाब 840.08
राजस्थान 823.17
सिक्किम 56.50
तमिलनाडु 183.67
त्रिपुरा 378.83
उत्तराखंड 647.67
पश्चिम बंगाल 1467.25

कुल 9871.00

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