छत्तीसगढ़

सेंट्रल बैंक में 25 लाख का गमन करने वाला अफ़सर गिरफ्तार

एसपी सदानन्द कुमार ने किया खलास

– पृथ्वीलाल केशरी

रामानुजगंज :- सरगुजा संभाग के सेंट्रल बैंक सीतापुर शाखा के लाभांश की राशि में से 25 लाख रुपये का गबन करने वाले अफसर को पुलिस ने दिल्ली के बुराड़ी से गिरफ्तार किया है। आरोपी विकास आनंद पिता जनार्दन प्रसाद मुजफ्फरपुर बिहार के पोखरिया अतरदाह का रहने वाला है। वर्ष 2016 में बैंक प्रबंधक ने 25 लाख की गड़बड़ी का मामला सीतापुर थाने में दर्ज कराया था, लेकिन प्रबंधन इससे अनभिज्ञ था कि बैंक को फेक एकाउंट से चूना लगाने वाला कोई बाहरी नहीं बल्कि बैंक का प्रोविजनल अफसर है,जिसकी नियुक्ति वर्ष 2010 से 2012 के बीच सेंट्रल बैंक के सीतापुर शाखा में हुई थी।

आईजी सरगुजा रेंज हिमांशु गुप्ता के निर्देशन में गबन के मामले के आरोपी को गिरफ्तार करने में मिली सफलता की जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक सदानंद कुमार ने बताया कि सेंट्रल बैंक सीतापुर में वर्ष 2011-2012 में बैंक के लाभांस की राशि में हुई 25 लाख की गड़बड़ी का खुलासा बैंक के मुख्यालय नोएडा में हुए ऑडिट के दौरान हुआ था। ऑडिट में सामने आया कि सीतापुर क्षेत्र निवासी किसी उषा माला कुजूर के खाते के माध्यम से फर्जीवाड़ा किया गया है। इसकी जानकारी सीतापुर बैंक प्रबंधन को मुख्यालय से हुए पत्राचार के बाद मिली थी। बैंक ने मैन्युअल के बाद कोर बैंकिंग के रिकार्ड को खंगाला, तो बड़ी सफाई से हुई गड़बड़ी की पुष्टि हुई और वर्ष 2016 में थाना सीतापुर में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

एसपी ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आने के बाद उन्होंने बैंक के मुख्यालय नासिक के अधिकारियों से संपर्क किया। इस दौरान सामने आया कि वर्ष 2010 से 2012 के बीच सीतापुर सेंट्रल बैंक में प्रोविजनल अफसर के रूप में मुजफ्फरपुर बिहार के पोखरिया अतरदाह विकास आनंद पिता जनार्दन प्रसाद की नियुक्ति हुई थी। प्रमोशन होने के बाद उनका स्थानांतरण नोएडा हुआ था।

नासिक में पदस्थापना के बाद उसके द्वारा तीन अलग-अलग शाखाओं में पदस्थापना के दौरान 67 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई थी। इसका खुलासा लंबी रकम की गड़बड़ी के सामने आने के बाद विभागीय जांच संस्थित की गई थी, जिसमें बैंक के अफसर द्वारा गड़बड़ी किया जाना सामने आया और विकास आनंद को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। आरोपी के द्वारा बैंक को पहुंचाई गई क्षति की पूर्ति संपत्ति बेचकर और पिता के बैंक एकाउंट में जमा रकम से की गई थी, जिससे इसकी रिपोर्ट बैंक के मुख्यालय स्तर के अधिकारियों ने थाने में नहीं की थी। वहीं रिपोर्ट के बाद दो वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़े 25 लाख के गबन के इस मामले पर सरगुजा पुलिस अधीक्षक सदानन्द कुमार ने रूचि ली और स्वयं के मार्गदर्शन में संचालित विशेष अनुसंधान दल के साथ प्रकरण की विवेचना में जुटे।

कुमार ने अपने संपर्क संबंधों का फायदा उठाकर आरोपी का पता-ठिकाना खोज निकाला और विशेष अनुसंधान दल के उपनिरीक्षक प्रियेस जॉन, प्रधान आरक्षक पन्नालाल, आरक्षक अरविंद उपाध्याय, आरक्षक निरंजन बड़ा एवं कोतवाली व क्राइम ब्रांच से उपनिरीक्षक चेतन कुमार चंद्राकर, आरक्षक संजीव कुमार चौबे, भोजराज पासवान की टीम को दिल्ली रवाना किया था। यहां से आरोपी को गिरफ्तार करने में पुलिस सफल हुई, जो अपना पूर्व पता एवं संपर्क बदलकर गायब हो गया था। आरोपी की पत्नी इंडियन ओवरसिस बैंक में पीओ के पद पर पदस्थ है। श्री कुमार ने बताया कि सीतापुर में आरोपी विकास आनंद के पदस्थापना दौरान तीन बार ऑडिट हुई, लेकिन 25 लाख की गड़बड़ी सामने नहीं आई। सेंट्रल बैंक में बड़ी रकम का चपत लगाने वाला आफिसर सीतापुर से प्रमोशन में नोएडा गया था। यहां तीन अलग-अलग शाखाओं में कार्यरत रहकर पर्दे के पीछे धोखाधड़ी करता रहा। दो शाखाओं में पदस्थापना के समय दौरान लाखों की गड़बड़ी सामने आने पर मुख्यालय के अधिकारी सकते में आ गए और फेंक एकाउंट से चल रही गड़बड़ी का पता लगाया, तो पता चला कि इस कार्य को अंजाम देने वाला कोई बाहरी नहीं बल्कि उनके बैंक का ही अफसर है।