केंद्र और WhatsApp आमने सामने, अधिकारियों ने नहीं बताई यह बात

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि व्हाट्सएप (WhatsApp) के शीर्ष अधिकारियों के साथ जून से लेकर सितंबर के बीच हुई कई दौर की बातचीत में कंपनी ने एक बार भी पेगासस हैकिंग मामले का उल्लेख नहीं किया।

जबकि इस दौरान सरकार उसके समक्ष फेक न्यूज और अफवाहों के स्रोत का पता लगाने के लिए कह रही थी। इसलिए उसकी मंशा पर सरकार को संदेह है।

केंद्र सरकार के सूत्रों ने प्रश्न उठाया कि कहीं यह व्हाट्सएप(WhatsApp) संदेशों के स्रोत की जानकारी तथा जवाबदेही तय करने के लिए कोई कदम उठाने से सरकार को रोकने के लिए कंपनी की ओर से कोई अडंगा जैसी चाल तो नहीं है? सरकार हैकिंग मामले के खुलासे के समय को लेकर भी सवाल कर रही है।

यह इस कारण महत्वपूर्ण हो जाता है कि केंद्र सरकार ने देश में सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के उपाय के लिए उच्चतम न्यायालय से तीन महीने का समय मांगा है।

सूत्रों ने आशंका जाहिर की कि यह एक साजिश के तहत हो सकता है। सूत्रों ने कहा कि सरकार दुर्भावनापूर्ण संदेशों की सामग्री के बजाय उसका स्रोत जानने पर आगे भी जोर देगी। पहले भी इस मुद्दे को व्हाट्सएप(WhatsApp) के समक्ष उठाया गया है।

केंद्र सरकार के सूचना नहीं देने के दावे के बीच फेसबुक के स्वामित्व वाले व्हाट्सएप(WhatsApp) ने शुक्रवार को कहा कि मई में हमने एक सुरक्षा मुद्दे को हल किया और संबंधित भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय सरकारी अधिकारियों को सूचित किया था।

इसके बाद से ही हमने लगातार निशाने पर आए यूजर्स की पहचान की और उनसे कहा कि वो अदालतों को कहें कि अंतरराष्ट्रीय सॉफ्टवेयर फर्म एनएसओ की जिम्मेदारी तय की जाए।

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