चीनी कंपनियों हुवावे एवं जेट कारपोरेशन को 5G नेटवर्क से बाहर रखे केंद्र सरकार- कैट

दोनों कंपनियों को 5 जी नेटवर्क से दूर रखा जाना देश के बड़े हित में होगा -कैट

रायपुर: कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट)के प्रदेश अध्यक्ष अमर परवानी,कार्यकारी अध्यक्ष मंगेलाल मालू, विक्रम सिंहदेव, महामंत्री जितेंद्र दोषी, कार्यकारी महामंत्री परमानंद जैन, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल, प्रवक्ता राजकुमार राठी ने बताया कि चीनी सामान के बहिष्कार के अपने राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने केंद्र सरकार से यह मांग की है की देश में कुछ समय बाद लागू होने वाले 5 जी नेटवर्क की प्रक्रिया से चीनी कंपनियों हुवावे तथा जेट कारपोरेशन को पूर्ण रूप से बाहर रखा जाए। केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद को आज भेजे एक पत्र में कैट ने मांग की है की भारत की सम्प्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा लोगों के व्यक्तिगत डाटा की सुरक्षा को देखते हुए इन दोनों कंपनियों को 5 जी नेटवर्क में भाग न लेने का निर्णय लिया जाए । ऐसे समय में जब सारा राष्ट्र चीन द्वारा भारत के बॉर्डर पर अनेक प्रकार की अवांछनीय गतिविधियां कर रहा है है, ऐसी में किसी भी चीनी कम्पनी को सुरक्षा से सम्बंधित किसी भी विषय पर जोड़ना भारत के हित में नहीं है।

कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने श्री प्रसाद को भेजे पत्र में कहा की जिस प्रकार से सरकार ने देश की सुरक्षा और सम्प्रभुता को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से हाल ही में 59 ऐप को प्रतिबंधित किया गया है उसी नीति का पालन करते हुए सरकार को हुवावे एवं जेट कारपोरेशन को 5 जी प्रक्रिया में शामिल नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने कहा की जिस तेजी से भारत में स्मार्टफोन के उपयोग में प्रतिवर्ष वृद्धि हो रही है उस कारण से भारत का विशाल डाटा भी 5 जी के जरिये इकठ्ठा होगा । उस डाटा का कोई दुरूपयोग न हो और डाटा भारत के हितों के विरुद्ध इस्तेमाल न हो , उसको रोकने के लिए वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए , इन दोनों कंपनियों को 5 जी नेटवर्क से दूर रखा जाना देश के बड़े हित में होगा !

श्री पारवानी ने भारत सरकार और अन्य राज्य सरकारों की सराहना करते हुए कहा की इस विषय की गंभीरता इसी बात से डंझि जा सकती है की केंद्र सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए जहाँ चीनी ऐप को प्रतिबंधित किया वहां दूसरी ओर रेलवे, हाईवे एवं अन्य क्षत्रों में चीनी कंपनियों के साथ हुए ठेकों को रद्द किया गया वहीँ महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों ने भी चीनी कामोनियों के साथ हुए अनुबंधों को रॉड करने का निर्णय लिया है ! उधर दूसरी तरफ कैट के अभियान का समर्थन करते हुए अनेक क्षेत्रों के व्यापारियों और उद्योगपतियों ने भी आवश्यक कदम उठाते हुए चीनी कंपनियों के साथ चल रहे व्यापार को समाप्त किया है जो इस बात का स्पष्ट संकेत है की देश अब एकजुट होकर चीन के खिलाफ आर्थिक मोर्चाबंदी करने के लिए संकल्प ले चुका है।

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