प्‍याज के लिए नई न्‍यूनतम निर्यात दरों पर विचार कर रही केंद्र सरकार

देश में प्‍याज की पैदावार और कीमतों पर लगातार नजर रख रही सरकार

नई दिल्ली: दक्षिणी राज्यों में भारी बारिश की वजह से प्याज की फसलों को नुकसान हुआ है. इस वजह से घरेलू बाजार में प्याज की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं. थोक मंडियों में 8 अगस्त के बाद से प्याज की कीमतों में लगातार तेजी आ रही है. इस दौरान कीमतें बढ़कर 2,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं.

इस बीच केंद्र सरकार प्‍याज के लिए नई न्‍यूनतम निर्यात दरों (MEP) पर विचार कर रही है. केंद्र सरकार देश में प्‍याज की पैदावार और कीमतों पर लगातार नजर रख रही है. वहीं, प्‍याज की कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए नैफैड मुंबई, दिल्‍ली, कोलकाता, हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणे और इंदौर को 500 मीट्रिक टन प्‍याज की तत्‍काल आपूर्ति करेगा.

वित्‍त मंत्रालय प्‍याज की मौजूदा कीमतों का विस्‍तृत अध्‍ययन कर रहा है. वित्‍त मंत्रालय का मानना है कि प्‍याज की कीमतों में उछाल बिना मांग में बढ़ोतरी हुए आया है. सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार जल्‍द ही प्‍याज के निर्यात की नई न्‍यूनतम दरें तय कर सकती है. वहीं, पैदावार बढ़ाने के लिए भारी मात्रा में प्‍याज के बीज की खरीद की जाएगी.

भारी बारिश के कारण फसल को हुआ नुकसान

भारत में दुनिया का सबसे ज्‍यादा प्‍याज उत्‍पादन होता है. दक्षिण एशियाई खदानों में प्याज का सबसे ज्यादा इस्तेमाल भी होता है. यही कारण है कि बांग्लादेश, नेपाल, मलेशिया और श्रीलंका जैसे देश भारतीय प्याज पर निर्भर हैं. एक महीने के अंदर महाराष्ट्र के लासलगांव में प्याज का थोक भाव 30,000 रुपये प्रति टन पहुंच गया है. लासलगांव देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी है.

मुंबई में प्याज निर्यात संघ के अध्यक्ष अजित शाह ने बताया कि कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे ​दक्षिण राज्यों में इस साल भारी बारिश हुई है. इससे प्याज की फसल को नुकसान पहुंचा है. वहीं, अन्य राज्यों में फिलहाल प्याज की फसल में देरी हो रही है.

15 दिन तक कीमतें घटने की कोई उम्‍मीद नहीं

खुदरा बाजार में 15-20 रुपये प्रति किग्रा के भाव पर बिकने वाले प्याज की कीमतें इस समय 35-45 रुपये हो गई हैं. कारोबारियों का कहना है कि आलू के बाद अब प्याज की कीमतों में तेजी आ रही है. दरअसल, भारी बारिश की वजह से फसल को हुए नुकसान के कारण उत्तर भारत समेत कई इलाकों में आवक घट गई है.

अगले 15 दिन तक प्याज की कीमतों में कमी की कोई उम्मीद नहीं है. बता दें कि प्याज का उत्पादन मुख्यत: छह राज्यों में होता है. 50 फीसदी प्याज भारत की 10 मंडियों से ही आता है. इनमें से छह महाराष्ट्र और कर्नाटक में हैं.

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