इस बड़े बैंक में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचेगी केंद्र सरकार, ग्राहकों-कर्मचारियों को सता रही चिंता

सीतारमण ने इस बैंक में सरकार की हिस्सेदारी खत्म करने की बात कही थी।

नई दिल्ली। पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट और CCEA की बैठक में आज IDBI बैंक में पूरी हिस्सेदारी बेचने को स्वीकृति दे दी है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने भी अपने बजट भाषण में इस बैंक के बारे जिक्र किया था। सीतारमण ने इस बैंक में सरकार की हिस्सेदारी खत्म करने की बात कही थी। IDBI बैंक की मुश्किलें खत्म करने के लिए LIC और केंद्र सरकार ने इक्विटी पूंजी के रूप में 9,300 करोड़ रुपए का निवेश किया था, अब LIC इस बैंक की कर्ताधर्ता बन गई है।

1964 में शुरु किया गया आईडीबीआई एक सरकारी बैंक था, LIC ने 21000 करोड़ रु का निवेश करके इसकी 51 फीसदी हिस्सेदारी ख़रीदी है। आईडीबीआई बैंक में सरकार की करीब 45.48 फीसदी हिस्सेदारी है। एलआईसी ने इस बैंक का अधिग्रहण कर लिया है।

आज CCEA की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए, IDBI बैंक में रणनीतिक तौर पर हिस्सेदारी बेचने और मैनेजमेंट कंट्रोल हस्तांतरित करने को स्वीक़ति दे दी है। LIC ने पहले ही बैंक में हिस्सेदारी कम करने को मंजूरी दे दी थी।

विशेषज्ञों की मानें तो बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों पर इसका कोई असर नहीं होगा। सब कुछ पूर्ववत की तरह चलता रहेगा। बता दें कि सरकार के हिस्सेदारी बेचने के बाद आईडीबीआई बैंक ने पांच साल बाद मुनाफा कमाया है। 31 मार्च 2021 को खत्म हुए वित्तीय वर्ष में बैंक ने 1,359 करोड़ रु का मुनाफा अर्जित किया है। इससे एक साल पहले वित्त वर्ष 2019-20 में बैंक को 12,887 करोड़ रु का नुकसान झेलना पड़ा था।

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