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प्रमोशन में आरक्षण को केंद्र सरकार की हरी झंडी

वेणुगोपाल ने ये भी कहा कि राज्य में एससी-एसटी की जनसंख्या के आधार पर आरक्षण तय होता है

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने प्रमोशन में आरक्षण का समर्थन करते हुए कहा कि हजारों साल से एससी-एसटी समाज के लोग हाशिए पर हैं। ऐसी स्थिति में यह जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ अपने फैसले की समीक्षा करे।

शुक्रवार को प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर शुरू हुई सुनवाई में केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखा कि एससी-एसटी वर्ग हज़ार साल से उत्पीड़न झेल रहा है. उनके पिछड़ेपन के अलग से आंकड़े जुटाने की ज़रूरत नहीं है.

केंद्र की तरफ़ से एटार्नी जनरल वेणुगोपाल ने ये जवाब दिया जब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सवाल किया कि अगर आंकड़े नहीं होंगे तो सरकार ये कैसे पता करेगी कि एससी-एसटी वर्ग का नौकरियों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व है कि नहीं.

वेणुगोपाल ने ये भी कहा कि राज्य में एससी-एसटी की जनसंख्या के आधार पर आरक्षण तय होता है जिसके मुताबिक पर्याप्त प्रतिनिधित्व के लिए एससी-एसटी को कुल साढ़े 22 फ़ीसदी आरक्षण मिलना चाहिए. दरअसल, ये सुनवाई 2006 के एम नागराज के फ़ैसले पर पुनर्विचार को लेकर शुरू हुई है.

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प्रमोशन में आरक्षण को केंद्र सरकार की हरी झंडी
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