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अब विश्वविद्यालयों को प्रवेश के दौरान ही देनी होगी हर कोर्स के लिए आरक्षित सीटों की जानकारी

नई दिल्ली : विश्वविद्यालयों को अब प्रवेश के दौरान ही प्रत्येक कोर्स और विषयों की आरक्षित सीटों का ब्यौरा देना होगा। इसका निर्धारण समाज के अलग-अलग वर्गों को दिए गए आरक्षण के हिसाब ही होगा। यूजीसी ने फिलहाल सभी केंद्रीय विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थानों को इसके अमल के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा है कि वह संस्थान में प्रवेश के लिए उपलब्ध कुल सीटों में से ऐसी सीटों को चिंहित करने के साथ इन्हें प्रदर्शित भी किया जाए।

यूजीसी ने यह निर्देश उस समय दिया है, जब हाल ही में सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को दस फीसद आरक्षण दिया गया है। केंद्रीय विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रवेश में इस पर पहली बार अमल होगा।

मौजूदा समय में फिलहाल जिन वर्गो को आरक्षण मिल रहा है, उनमें एससी को 15 फीसदी, एसटी को 7.5 फीसदी और ओबीसी को 27 फीसद आरक्षण देने का प्रावधान है। अब इसमें सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़ों को दिए गया दस फीसद आरक्षण भी जुड़ जाएगा।

प्रत्येक कोर्स में आरक्षित सीटों की संख्या को सामने लाने के पीछे सरकार का मकसद बिल्कुल साफ है। वह यह दिखाना चाहती है, कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को दस फीसद आरक्षण देने के बाद पहले से आरक्षित वर्ग को मिलने वाली सीटों की संख्या में कोई कमी नहीं हुई है।

सरकार ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को दस फीसद आरक्षण देने के बाद ही यह घोषणा की थी, कि इससे संस्थानों में आरक्षित वर्ग को मिलने वाले लाभ में कोई कटौती नहीं होगी। यानि उन्हें पहले की तरह ही सीटें मिलेगी।

सामान्य वर्ग को दिया गया दस फीसद आरक्षण मौजूदा सीटों के अतिरिक्त होगा, इसके लिए प्रत्येक संस्थानों में दस फीसद सीटें बढ़ाई जाएंंगी। सरकार ने प्रत्येक कोर्स में सीटों को बढ़ाने के लिए निर्देश भी दे दिया था। इसके तहत इस साल दस फीसद सीटें बढ़ाई जाएंगी। जबकि अगले साल सीटों में 15 फीसद की बढ़ोत्तरी होगी।

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