अब गंदगी खाने वाले बैक्टीरिया से साफ होगी गंगा

गंगा की सफाई के लिए भारत सरकार एक नया उपाय लेकर आई है. सरकार ने अब माइक्रोब्स के जरिए गंगा की सफाई करने की योजना बनाई है. ये माइक्रोब्स गंगा की ओर बह रहे सीवेज को अपना भोजन बना लेंगे.

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स लगाने में काफी समय लगता है. ऐसे में सरकार बैक्टीरियल बायोरेमेडिएशन तकनीक के जरिए गंगा के पानी को स्वच्छ बनाना चाहती है.

STP के काम करना शुरू करने में 2 से 3 साल लग सकते हैं. सीवेज खाने वाले जीवाणुओं (सीवेज-इटिंग माइक्रोब्स) के इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर जैविक उपचार (बायोरेमेडिएशन) कर गंगा नदी में मदद मिलेगी.

कम खर्चीली है यह तकनीक

खबर के मुताबिक, इस बायॉरेमेडिएशन टेक्नीक के तहत ये माइक्रोब्स नदी के पानी में मौजूद गंदगी तेल और ऑर्गैनिक मैटर को खा लेते हैं. इस प्रक्रिया में बदबू भी नहीं आती है.

ट्रीटमेंट की प्रक्रिया के दौरान हेवी मेटल और जहरीले रसायन कम हो जाते हैं. पटना के बाकरगंज नाले में इस तकनीक का सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा चुका है.

चार राज्यों में 54 स्थानों पर ऐसे नालों की पहचान की गई है जहां इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इन 54 स्थानों पर बायॉरेमेडिएशन टेक्नीक के जरिए सीधे गंगा नदी में मिल रहे गंदे पानी को रोका जा सकता है.

यह तकनीक ज्यादा खर्चीली भी नहीं है और इसके शुरू होने में महज 6 से 8 महीने का ही समय लगता है.

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