चैतन्य महाप्रभु की धार्मिक स्थली नवद्वीप- मायापुर में पत्रकारों ने किया भ्रमण

सारस्वत अद्वैत मठ और चैतन्य गौड़ीया मठ की यात्रा भी कर सकते हैं

रवि सेन

बागबाहरा। छत्तीसगढ़ के बागबाहरा से पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में स्थित चैतन्य महाप्रभु की धार्मिक स्थली नवद्वीप- मायापुर के भ्रमण पर पत्रकारों का एक दल साल के आरंभ में गया था।

नवद्वीप-मायापुर अपने शानदार मन्दिरों के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। इन मन्दिरों में भगवान श्री कृष्ण को समर्पित इस्कॉन मन्दिर प्रमुख है। मन्दिरों के अलावा पर्यटक यहां पर सारस्वत अद्वैत मठ और चैतन्य गौड़ीया मठ की यात्रा भी कर सकते हैं।

होली के दिनों मे मायापुर की छटा देखने लायक होती है क्योंकि उस समय यहां विश्व में स्थित सभी इस्कान मंदिरों के प्रमुख संचालनकर्ता एवं देशी-विदेशी भक्तों की मौजूदगी में वार्षिक सेमिनार, धार्मिक आयोजनों के साथ विश्व के सभी इस्कान मंदिरों की बजट निर्धारित की जाती है।

भव्य रथयात्रा का आयोजन

रथयात्रा के मौके पर यहां भव्य रथयात्रा आयोजित की जाती है। यह रथयात्रा आपसी सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक मानी जाती है।
मायापुर पश्चिम बंगाल के नदिया जिला में गंगा नदी के किनारे, उसकी सहायक नदी जलांगी नदी के संगम बिंदु पर बसा हुआ एक छोटा सा शहर है।

यह नवद्वीप के निकट है। यह कोलकाता से १३० कि॰मी॰ उत्तर में स्थित है। यह हिन्दू धर्म के गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय के लिए अति पावन स्थल है।

यहीं हुआ था चैतन्य महाप्रभु का जन्म

यहां उनके प्रवर्तक श्री चैतन्य महाप्रभु का जन्म हुआ था। इन्हें श्री कृष्ण एवं श्री राधा का अवतार माना जाता है। यहां लाखों श्रद्धालु तीर्थयात्री प्रत्येक वर्ष दशनों हेतु आते हैं। यहां इस्कॉन समाज का बनवाया भव्य चंद्रोदय मंदिर भी है।

इसे इस्कॉन मंदिर, मायापुर हते हैं। इस्कॉन मंदिर में विभिन्न शैली, अवतार और मुद्राओं वाली मूर्तियाँ रखी हुई हैं। परिसर बड़ा है और इसमें अनेक मंदिर हैं। मुख्य इमारत समकालीन वास्तुकला को प्रदर्शित करती है जो पारंपरिक शैली के तत्वों से मिलकर बनी है।

प्रवेश द्वार पर कमल का झरना, जो लगाता है सुंदरता में चार-चांद

एक प्रमुख मंदिर के प्रवेश द्वार पर एक कमल झरना है जो इसकी सुंदरता बढ़ाता है। विश्व प्रसिद्ध फोर्ड मोटर कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अल्फ्रेड फोर्ड (अंबरीश फोर्ड) भगवान कृष्ण के बड़े भक्त हैं।

वे कृष्ण भक्ति में ऐसे तल्लीन हुए कि अब हरे कृष्णा आंदोलन को ऊंचाइयों तक पहुंचाना ही उनका उद्देश्य है। इस्कॉन के संस्थापक श्रील प्रभुपाद का सपना था इस्कॉन मुख्यालय मायापुर (पश्चिम बंगाल) में वैदिक तकनीक से सबसे बड़ा मंदिर बनाने का, जिसे फोर्ड ने पूरा करने का निर्णय लिया।

मुख्यालय मायापुर में संस्था का सबसे बड़ा मंदिर स्थापित

उन्होंने 50 एकड़ जमीन पर 700 करोड़ की लागत से बनने वाले ‘मायापुर चंद्रोदय मंदिर’ के लिए 200 करोड़ रुपये का दान भी दिया है। इस्कॉन आंदोलन के मुख्यालय मायापुर में पहले से ही संस्था का सबसे बड़ा मंदिर स्थापित है।

मायापुर इस्कॉन के चेयरमैन पद की जिम्मेदारी संभालते हुए अल्फ्रेड फोर्ड ने मंदिर निर्माण का प्रोजेक्ट अपने हाथ में ले रखा है। मंदिर निर्माण का जिम्मा संभाल रही गैमन इंडिया लिमिटेड ने मंदिर के लगभग 80 प्रतिशत कार्य का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है

मायापुर इस्कान मंदिर के जनसम्पर्क अधिकारी रसिक गौरांग दास उर्फ रमेश महाराज ने बागबाहरा के पत्रकारों से एक चर्चा में बताया कि मकर संक्रांति के अवसर पर गंगासागर में आयोजित स्नान मेले में वे खुद 21 देशों से आएं।

11 से 16 जनवरी तक लगेगा कैम्प

80 विदेशी गुरूकुल छात्रों एवं इस्कॉन से जुड़े आठ सौ स्वयं सेवकों के साथ 11 जनवरी 2019 से 16 जनवरी 2019 तक गंगासागर मेला प्रांगण में कैम्प लगा कर उपस्थित रहेंगे।

इस दौरान करीब 1 लाख से भी अधिक मेले में आने वाले तीर्थयात्रियों को निशुल्क भोजन एवं रात्रिकालीन विश्राम के साथ मेडिकल सुविधा तथा वस्त्र एवं कम्बल वितरण की व्यवस्था की जाएगी।मेले में आने वाले तीर्थयात्री रसिक गौरांग दास उर्फ रमेश महाराज से मेला प्रांगण में स्थित कैम्प में जाकर सीधा सम्पर्क कर सकते हैं।

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