चंद्रग्रहण: क्या है सूतक का समय और इसके दुष्प्रभाव से बचने के उपाय

ग्रहण का असर हर राशि पर पड़ता है लेकिन गर्भवती स्त्री और उसके होने वाले बच्चे के लिए इसे शुभ नहीं माना जाता

चंद्रग्रहण: क्या है सूतक का समय और इसके दुष्प्रभाव से बचने के उपाय

चंद्र ग्रहण उस स्थिति को कहते हैं जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में आ जाता है. ऐसा तभी हो सकता है जब सूर्य पृथ्वी और चंद्रमा इस क्रम में लगभग एक सीधी रेखा में हों. इस कारण चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा तिथि को ही घटित हो सकता है. चंद्र ग्रहण का प्रकार और अवधि चंद्र आसंधियों के सापेक्ष चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करते हैं.
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सूर्य ग्रहण के विपरीत, जो कि पृथ्वी के एक अपेक्षाकृत छोटे भाग से ही दिख पता है, चन्द्र ग्रहण को पृथ्वी के रात्रि पक्ष के किसी भी भाग से देखा जा सकता है. ब्रह्मांड में घटने वाली यह घटना है तो खगोलीय मगर इस घटना का धार्मिक महत्व भी बहुत है. इसका असर लोगों पर शगुन और अपशगुन के रूप में देखा जा सकता है , साथ ही इसका असर जन्म कुंडली में 12 राशियों और ग्रहों पर भी पड़ता है.

2018 में चन्द्र ग्रहण

1. 31 जनवरी 2018

2. 27-28 जुलाई 2018

31 जनवरी 2018 को पड़ने वाला पूर्ण चंद्र ग्रहण का असर भारत सहित उत्तर पूर्वी यूरोप, एशिया ऑस्ट्रेलिया, उत्तर पश्चिमी अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, उत्तर पश्चिमी दक्षिण अमेरिका, पेसिफिक, अटलांटिक, हिंद महासागर, आर्कटिक, अंटार्कटिका जैस जगह पर भी पड़ेगा

चंद्र ग्रहण और सूतक समय

माघ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा यानी 31 जनवरी को 2018 का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है. यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा. वैसे ग्रहण चाहे आंशिक हो या पूर्ण, यह किसी को शारीरिक, किसी को सामाजिक साथ ही किसी को आर्थिक कष्ट देता है.

ग्रहण का असर हर राशि पर पड़ता है लेकिन गर्भवती स्त्री और उसके होने वाले बच्चे के लिए इसे शुभ नहीं माना जाता. कहा जाता है कि किसी भी चंद्र ग्रहण का प्रभाव 108 दिनों तक रहता है. ऐसे में गर्भवती महिला को लेकर ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है.

इस दिन चांद तीन रंगों में दिखाई देगा. जिसमें सूपर मून, ब्लू मून और ब्लड मूल तीन रूप होंगे. चांद की तीन खूबियां किसी एक चंद्र ग्रहण के दौरान दिखना दुर्लभ खगोली घटना होती है.142 वर्षो में यह पहली घटना होगी इससे पहले इस तरह की घटना 1866 में हुई थी. यह घटना सिर्फ अमेरिका में देखी गई थी इस दिन चंद्रमा पूर्ण होगा साथ ही यह लाल रंग में नजर आएगा.

क्या है वैज्ञानिक मान्यता

ग्रहण के वक्त वातावरण में नकारात्मक शक्ति का संचार होता है. इसलिए इस समय को अशुभ माना जाता है. इस दौरान अल्ट्रावॉयलेट किरणें निकलती हैं जो एंजाइम सिस्टम को प्रभावित करती हैं, इसलिए ग्रहण के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत होती है. इस समय चंद्रमा, पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है, जिससे गुरुत्वाकर्षण का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है. इसी कारण समुद्र में ज्वार भाटा आते हैं. भूकंप भी गुरुत्वाकर्षण के घटने और बढ़ने के कारण ही आते हैं, अतः ग्रहण काल के समय या उसके उपरांत ज्वार भाटा और भूकंप आने की सम्भावना रहती है.

पौराणिक मान्यता

ज्योतिष के अनुसार राहु ,केतु अनिष्टकारक ग्रह माने गए हैं. चंद्रग्रहण के समय राहु और केतु की छाया सूर्य और चंद्रमा पर पड़ती है, इस कारण सृष्टि अपवित्र और दूषित हो जाती है.

भारत में 31 जनवरी को शाम लगभग 5.18 बजे यह घटना देश के विभिन्न हिस्सों में दिखनी शुरू हो जाएगी. चंद्र ग्रहण की पूरी घटना शाम 6.12 बजे से रात्रि 8:45 बजे तक देखी जा सकेगी.

ग्रहण सूतक समय

ग्रहण का सूतक 1 घंटे पहले लगता है. ग्रहण सूतक समय प्रातः 8:20 ग्रहण स्पर्श : सायं काल 5:20 ग्रहण मध्य : सायं काल 7:05 ग्रहण मोक्ष रात्रि 8:45

वर्तमान वर्ष 31-1-2018 में पूर्ण चंद्र ग्रहण पड़ रहा है. जो कि चंद्रमा अमृत रूपी किरणों से समस्त पृथ्वी पर वृक्षों, जल जीव जंतुओं एवं मनुष्यों को अपनी किरणों से सभी को जीवन दान देता है। चन्द्र ग्रहण में चंद्रमा की अमृत रुपी किरणें कालिमा छाया से पृथ्वी पर आने से रुक जाती हैं, जिससे पृथ्वी पर विषैले तत्व बढ़ जाते हैैं. जिसके कारण सभी जीव प्रभावित होते हैं.

ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचने के उपाय

सनातन धर्मानुसार ऋषि मुनियों ने इनके दुष्प्रभाव से बचने के लिए कुछ उपाय बताए हैं जो कि निम्न है:

1.ग्रहण में सभी वस्तुओं में कुश डाल देनी चाहिए कुश से दूषित किरणों का प्रभाव नहीं पड़ता है, क्योंकि कुश जड़ी- बूटी का काम करती है.

2. ग्रहण के समय तुलसी और शमी के पेड़ को नहीं छूना चाहिए. कैंची, चाकू या फिर किसी भी धारदार वस्तु का प्रयोग नहीं करना चाहिए.

3. ग्रहण में किसी भी भगवान की मूर्ति और तस्वीर को स्पर्श नहीं चाहिए. इतना ही नहीं सूतक के समय से ही मंदिर के दरवाजे बंद कर देने चाहिए.

4. ग्रहण के दिन सूतक लगने के बाद छोटे बच्चे, बुजुर्ग और रोगी के अलावा कोई व्यक्ति भोजन नहीं करे.

5. ग्रहण के समय खाना पकाने और खाना नहीं खाना चाहिए, इतना ही नहीं सोना से भी नहीं चाहिए. ऐसा कहा जाता है कि ग्रहण के वक्त सोने और खाने से सेहत पर बुरा असर पड़ता है.

6. क्योंकि ग्रहण के वक्त वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो कि बच्चे और मां दोनों के लिए हानिकारक मानी जाती है.

7. गर्भावस्था की स्थिति में ग्रहण काल के समय अपने कमरे में बैठ कर के भगवान का भजन ध्यान मंत्र या जप करें.

8. ग्रहण काल के समय प्रभु भजन, पाठ , मंत्र, जप सभी धर्मों के व्यक्तियों को करना चाहिए, साथ ही ग्रहण के दौरान पूरी तन्मयता और संयम से मंत्र जाप करना विशेष फल पहुंचाता है. इस दौरान अर्जित किया गया पुण्य अक्षय होता है। कहा जाता है इस दौरान किया गया जाप और दान, सालभर में किए गए दान और जाप के बराबर होता है.

9. ग्रहण के दिन सभी धर्मों के व्यतियों को शुद्ध आचरण करना चाहिए

10. किसी को किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं देना चाहिए, सब के साथ करना चाहिए.

11. सभी के साथ अच्छा व्यवहार करें, और मीठा बोलें.

12. ग्रहण के समय जाप, मंत्रोच्चारण, पूजा-पाठ और दान तो फलदायी होता ही है.

13. ग्रहण मोक्ष के बाद घर में सभी वस्तुओं पर गंगा जल छिड़कना चाहिए, उसके बाद स्नान आदि कर के भगवान की पूजा अर्चना करनी चाहिए और हवन करना चाहिए और भोजन दान करना चाहिए. धर्म सिंधु के अनुसार ग्रहण मोक्ष के उपरांत हवन करना, स्नान, स्वर्ण दान, तुला दान, गौ दान भी श्रेयस्कर है.

14. ग्रहण के समय वस्त्र, गेहूं, जौं, चना आदि का श्रद्धानुसार दान करें , जो कि श्रेष्ठकर होता है.

ग्रहण के समय इस पाठ और मंत्र का करें जाप

पाठ: दुर्गा सप्तशती कवच पाठ मंत्र: ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै

( ग्रहण काल में ॐ का उच्चारण नहीं करना चाहिए )

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