चांग ई-4 ने चाँद के उस हिस्से में सफल लैंडिंग की, जो नही दीखता धरती से

यान ने उस हिस्से पर साउथ पोल-एटकेन बेसिन के वोन कारमन क्रेटर में लैंडिंग की। यान ने वहां से लैंडिंग के समय की तस्वीर भी भेजी है।

बीजिंग।
अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में चीन ने बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। चीन के यान चांग ई-4 ने गुरुवार को चांद के उस हिस्से पर सफल लैंडिंग की, जो धरती से दिखाई नहीं देता है।

चांद के इस अनदेखे हिस्से पर उतरने वाला यह दुनिया का पहला यान है। चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (सीएनएसए) ने बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 10:26 बजे यान पहले से निर्धारित जगह पर उतरा।

यान ने उस हिस्से पर साउथ पोल-एटकेन बेसिन के वोन कारमन क्रेटर में लैंडिंग की। यान ने वहां से लैंडिंग के समय की तस्वीर भी भेजी है।

इस मिशन के तहत वहां की भू-संरचना और घाटियों का अध्ययन किया जाएगा। इस अभियान से चांद पर उपलब्ध खनिजों और उसकी सतह की संरचना को जानने में भी मदद मिलेगी।

चांग ई-4 यान को आठ दिसंबर को सिचुआन प्रांत के शिचांग सेटेलाइट लांच सेंटर से मार्च-3बी रॉकेट की मदद से लांच किया गया था।

सबसे बड़े इंपैक्ट क्रेटर में उतरा है यान

चांग ई-4 ने चांद के जिस साउथ पोल-एटकेन बेसिन को अध्ययन के लिए चुना है, वह हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ज्ञात इंपैक्ट क्रेटर है।

किसी ग्रह, उपग्रह या खगोलीय पिंड पर किसी छोटे पिंड के टकराने से बनी घाटी को इंपैक्ट क्रेटर कहा जाता है। चांद के इस क्रेटर का व्यास तकरीबन 2,500 किलोमीटर और गहराई करीब 13 किलोमीटर है।

संपर्क स्थापित करना भी है चुनौती

चांद के इस अनदेखे हिस्से पर भेजे गए यान और धरती पर स्थित केंद्र के बीच संपर्क स्थापित करना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।

यान और धरती के बीच संपर्क के लिए चीन ने मई में ही क्यूकिआओ नाम का एक रिले सेटेलाइट लांच कर दिया था।

क्यों अनदेखा है हिस्सा?

चांद अपनी धुरी पर इस तरह से घूमता है कि इसका 41 फीसद हिस्सा धरती से कभी नहीं दिखता। इस हिस्से के बारे में कोई जानकारी नहीं होने के कारण इसे ‘डार्क साइड’ भी कहा जाता है।

हालांकि यह हिस्सा अंधेरे में नहीं है। चांद के दोनों हिस्सों पर सूर्य की बराबर रोशनी पड़ती है और दोनों हिस्सों पर करीब दो-दो हफ्ते के दिन-रात होते हैं।

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