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पंजाब में मंत्रियों और उनके परिवारों की सुरक्षा के लिए लागू नीति में बदलाव

राज्यपाल से शराब कांड की सीबीआई जांच की मांग कर दी

जालंधर: पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य की सुरक्षा नीति संबंधी कमेटी की बैठक बुला ली है। सुरक्षा कमेटी की यह बैठक ऐसे समय में होने जा रही है, जब राज्य की कांग्रेस सरकार द्वारा अपनी ही पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा को प्रदान की गई पंजाब पुलिस की सुरक्षा वापस लिए जाने के फैसले से सियासी विवाद खड़ा हो गया है। प्रताप बाजवा ने जहां सरकार के फैसले को सियासी बदला लेने वाला बताया है, वहीं सीएम को बाजवा के आरोपों पर सफाई देनी पड़ी है।

इसलिए खड़ा हुआ सियासी विवाद :

दरअसल, यह सियासी विवाद इसलिए भी खड़ा हुआ क्योंकि पंजाब सरकार ने बाजवा की सुरक्षा उस समय वापस ली जब उन्होंने जहरीली शराब कांड में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाते हुए राज्यपाल से शराब कांड की सीबीआई जांच की मांग कर दी। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा कमेटी की प्रस्तावित बैठक में इस बार राज्य सरकार अपने मंत्रियों, पूर्व मंत्रियों, सांसदों, पूर्व सांसदों, विधायकों और पूर्व विधायकों की दी जाने वाली सुरक्षा के साथ-साथ ऐसे नेता, जिन्हें अत्यधिक खतरा है, के परिवारों को अलग से सुरक्षा मुहैया कराने का खाका तैयार करने जा रही है।

इसके लिए बैठक में, सुरक्षा विंग द्वारा इंटेलिजेंस विंग की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली ताजा थ्रेट प्रिशेप्शन रिपोर्ट (टीपीआर) के आधार पर फैसला लिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि इस समय राज्य में सुरक्षा हासिल सभी नेताओं को जितने जवान मिले हुए हैं, उन पर संबंधित नेता के साथ-साथ उनके परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी है। ऐसे में पूरी नफरी किसी भी समय अकेले नेता की सुरक्षा में मौजूद नहीं रह पाती।

6000 से ज्यादा जवान विभिन्न वीआईपी की सुरक्षा में तैनात :

राज्य में पुलिस के करीब 6000 से ज्यादा जवान विभिन्न वीआईपी की सुरक्षा में ड्यूटी दे रहे हैं। प्रताप बाजवा की सुरक्षा वापस लिए जाने के बाद राज्य सरकार का ध्यान इस और गया है कि उसके हजारों पुलिस जवान वीआईपी सुरक्षा में तैनात हैं और इस बात की लंबे समय से समीक्षा नहीं हो सकी है कि किस वीआईपी को वर्तमान में कितना खतरा है? कोविड-19 संकट शुरू होने के बाद हालांकि मुख्यमंत्री के निर्देश पर वीआईपी की सुरक्षा घटाते हुए 6500 जवानों को वापस बुला लिया गया था लेकिन इतनी ही बड़ी संख्या में जवान अभी वीआईपी सुरक्षा में लगे हैं।

मुख्यमंत्री घटा चुके हैं अपनी सुरक्षा :

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2017 में सत्ता संभालने के बाद सुरक्षा कमेटी की दूसरी बैठक में अपनी सुरक्षा घटाने का फैसला लिया था। इसके तहत सुरक्षा में लगे 1392 जवानों की घटाकर 1016 कर दिया गया था। इसके साथ ही राज्य में अन्य वीआईपी की सुरक्षा में तैनात करीब 1500 जवानों को वापस बुलाया गया था। इससे पहले कैप्टन सरकार की पहली सुरक्षा कमेटी की बैठक में 749 पुलिस जवानों को वीआईपी सुरक्षा से वापस बुलाने का फैसला किया गया था।

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