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ELSS को हर तीन साल में बदलने से हो सकता है नुकसान, जानें क्यूं

नई दिल्ली। इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) भले ही कम अवधि में बेहतर रिटर्न के साथ टैक्स बचाने की योजना है, लेकिन इसमें लॉकइन पीरियड खत्म होने के बाद तुरंत पैसा निकालना या फंड हाउस बदलना ठीक नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति के दौरान टैक्स बचाने की आपाधापी में ऐसा कुछ न करें जिससे आपका निवेश फंस जाए। ईएलएसएस में निवेश सिर्फ टैक्स छूट को ध्यान में रखकर पैसा न लगाएं, बल्कि कंपनी के लंबे अवधि रिटर्न, कारोबार की स्थिरता की जानकारी भी लें।

रिटर्न में उतार-चढ़ाव को देखते हुए हर तीन साल में बदलाव से बचने की कोशिश करनी चाहिए। निवेश में देरी करना ठीक नहीं ईएलएसएस या किसी अन्य टैक्स सेविंग स्कीम में निवेश वित्तीय वर्ष की शुरुआत में जितना जल्दी किया जाए, उतना बेहतर है। इससे आप उस वर्ष बेहतर कर छूट का दावा कर सकते हैं। आम निवेशकों को इसमें पूंजी एसआईपी या एसटीपी के जरिये ही लगानी चाहिए। दरअसल, ईएलएसएस में एक बार आपने गलत फंड का चुनाव कर लिया तो अगले तीन साल आप उसमें बदलाव नहीं कर सकते हैं।

लिहाजा सोच-समझकर और जानकारी लेकर ही पूंजी निवेश करें। लंबे अवधि के प्रदर्शन पर नजर रखें महिंद्रा म्युचुअल के सीईओ आशुतोष बिश्नोई का कहना है कि ईएलएसएस ही नहीं म्युचुअल फंड की सभी योजनाओं का आकलन लंबी अवधि में उनके रिटर्न के आधार पर करना चाहिए, न कि एक या दो साल के रिटर्न पर। कम से कम से चार पांच साल के रिटर्न को देखते हुए किसी फंड का चुनाव किया जाए तो बेहतर है।

छोटी पूंजी वाले निवेशक ज्यादा जोखिम वाली योजनाओं से दूर ही रहें तो बेहतर है। लाभांश के लालच में न आएं वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को ईएलएसएस में निवेश के दौरान लाभांश के विकल्प का भी लालच दिया जाता है। लेकिन आपको पता होना चाहिए कि यह लाभांश आपकी पूंजी से ही दिया जाता है। अगर आपको निश्चित समयांतराल पर धन की जरूरत नहीं है तो इस विकल्प को कतई न चुनें।

अगर आप लंबी अवधि में पैसा बनाना चाहते हैं तो ग्रोथ ऑप्शन को चुनना बेहतर है। कर छूट ही एकमात्र आधार न हो ईएलएसएस में निवेश का एकमात्र आधार टैक्स छूट न हो तो बेहतर है। यह जोखिम भरी स्कीम के साथ ऊंचा रिटर्न भी देती है। आपको योजना में लॉक इन पीरियड, रिटर्न और फंड हाउस का भी ध्यान रखना चाहिए। लॉक इन पीरियड के बाद भी अगर आपको पूंजी की जरूरत नहीं है तो रकम निकालना समझदारी नहीं है। इससे आगे बढ़ाया जा सकता है। कम से कम पांच या सात साल का निवेश बेहतर माना जाता है।

लिक्विड फंड से एसआईपी तक में निवेश का बेहतरीन मौका महिंद्रा म्युचुअल के एमडी और सीईओ आशुतोष बिश्नोई का कहना है कि आने वाले महीनों में लिक्विड फंड से लेकर एसआईपी तक में निवेश का बेहतरीन मौका है। चुनाव के दौरान अर्थव्यवस्था में काफी मात्रा में नकदी का प्रवाह होता है, ऐसे में निवेश पर बेहतरीन रिटर्न की संभावना है। चुनाव को लेकर हमेशा एक अनिश्चितता रहती है, लेकिन सस्ते वैल्यूएशन में पोर्टफोलियो तैयार करने के लिए सबसे अच्छा समय है। लेकिन कंपनी के कारोबार और मार्केट वैल्यूएशन पर जरूर ध्यान दें।

उन्होंने कहा कि उपभोग में लगातार बढ़ोतरी के साथ कंपनियों कंपनियों का मुनाफा भी बढ़ रहा है और लागत घट रही है। स्टील-कॉपर जैसी धातुओं की कीमत अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। लिहाजा यह समय अच्छी कंपनियों में निवेश के लिए बहुत अच्छा है। हर इंवेस्टर को चुनाव को इंवेस्टमेंट के मौके के तौर पर देखना चाहिए।

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