इस मंत्र को विशेष मंत्र को 108 बार जपें,पूरी होगी सारी मनोकामना

आज है गंगा जन्मोत्सव

आज वैशाख शुक्ल सप्तमी को गंगा सप्तमी पर गंगा जन्मोत्सव मनाया जाता है। विष्णु पुराण की मान्यता के अनुसार गंगा को विष्णु के बायें पैर के अंगूठे के नख से प्रवाहित माना है। महादेव ने अपनी जटा से गंगा को सात धाराओं में परिवर्तित किया है जिनमें नलिनी,ह्लदिनी व पावनी पूर्व में, सीता, चक्षुस व सिन्धु पश्चिम में व सातवीं धारा भागीरथी प्रवाहित हुई। पौराणिक आख्यान के अनुसार गंगा हिमालय व मैना की पुत्री तथा उमा की बहन हैं।

पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन देवी गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शंकर की जटाओं में पहुंची थीं। इसलिए पौराणिक कथानुसार जब कपिल मुनि के श्राप से सूर्यवंशी राजा सगर के 60 हज़ार पुत्र जल कर भस्म हो गए, तब उनके उद्धार के लिए सगर के वंशज भगीरथ ने घोर तपस्या की। वे अपनी कठिन तपस्या से गंगा को प्रसन्न कर धरती पर ले आए। गंगा के स्पर्श से ही सगर के 60 हज़ार पुत्रों का उद्धार हो सका। शास्त्रों ने गंगा को मोक्षदायिनी कहा है। पुराणों में गंगा को मंदाकिनी रूप में स्वर्ग, गंगा के रूप में पृथ्वी व भोगवती रूप में पाताल में प्रवाहित होते हुए वर्णित किया है।

विशेष पूजन: मध्यान काल में घर की उत्तर दिशा में लाल कपड़े पर जल का कलश स्थापित करें। ॐ गंगायै नमः का जाप करते हुए जल में थोड़ा सा दूध, रोली, अक्षत शक्कर, इत्र व शहद मिलाएं तथा कलश में अशोक के 7 पत्ते डालकर उस पर नारियल रखकर इसका पंचोपचार पूजन करें। शुद्ध घी का दीप करें, सुगंधित धूप करें, लाल कनेर के फूल चढ़ाएं, रक्त चंदन चढ़ाएं, सेब का फलाहार चढ़ाएं व गुड़ का भोग लगाएं। इस विशेष मंत्र को 108 बार जपें। इसके बाद फल किसी गरीब को बांट दें।

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