छत्तीसगढ़

NMDC के नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा कदम

उद्योग मंत्री कवासी लखमा की अनुपस्थिति में संसदीय कार्य मंत्री ने शासकीय संकल्प विधानसभा में पेश किया।

रायपुर, 24 दिसंबर 2020। देश की सबसे बड़ी सरकारी लौह अयस्क कंपनी एनएमडीसी के नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए विधानसभा में शासकीय संकल्प पेश कर दिया है। इस पर 28 दिसंबर को चर्चा होगी। सरकार का मानना है कि सार्वजनिक उपक्र्म के नाम पर नगरनार में सरकारी और निजी जमीनें अधिगृहित की गई। ऐसे में, स्टील प्लांट का निजीकरण बस्तर के लोगों के साथ धोखा होगा।

उद्योग मंत्री कवासी लखमा की अनुपस्थिति में संसदीय कार्य मंत्री ने शासकीय संकल्प विधानसभा में पेश किया। इस पर चर्चा के लिए नगरनार स्टील प्लांट से संबंधित दस्तावेज विधायकों को भेज दिए गए हैं।

जगदलपुर के पास नगरनार में एनएमडीसी 22 हजार करोड़ की लागत से स्टील प्लांट स्थापित कर रहा है। इसका 95 फीसदी काम पूरा हो गया है। डेढ़ हजार से अधिक लोगों की नियुक्तियां भी हो गई है। इनमें आठ सौ से अधिक तो नगरनार के स्थानीय लोग हैं, जिनकी जमीन ली गई है।

जानकारों का कहना है, नगरनार भिलाई स्टील प्लांट से भी क्षमता में बड़ा है। प्लांट के प्रारंभ होने के बाद जगदलपुर के पास एक नया स्टील सिटी बन जाएगा। लेकिन, इसके चालू होने के पहले ही इस पर ग्रहण लगता जा रहा है। तमाम विरोधों के बाद भी भारत सरकार ने विनिवेशीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नगरनार अगर बिक गया तो बालको के बाद छत्तीसगढ़ का दूसरा प्लांट होगा, जो प्रायवेट हाथों में चला जाएगा।

अगस्त में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख नगरनार प्लांट का निजीकरण रोकने का आग्रह किया था। उन्होंने लिखा था…केन्द्र सरकार बस्तर के नगरनार स्टील प्लांट को निजी लोगों के हाथों में बेचने की तैयारी में है, यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होगा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल में सार्वजनिक क्षेत्र के प्रस्तावित स्टील प्लांट का निजीकरण किया जाए। केन्द्र सरकार के इस कदम से लाखों आदिवासियों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को गहरा आघात पहंुचेगा।

नगरनार स्टील प्लांट का इस प्रकार के निजीकरण के समाचार से समुचे प्रदेश के साथ-साथ बस्तरवासियों को गहरा धक्का लगा है। भारत सरकार के इस प्रकार फैसले से आदिवासी समुदाय आंदोलित हो रहे है तथा इनके मध्य शासन-प्रशासन के विरूद्ध असंतोष की भावना व्याप्त हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखा कि आप इस बात से भली-भांति अवगत होंगे कि राज्य शासन काफी अथक प्रयासों से नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगाने में सफल हुई है।

इन परिस्थितियों में नगरनार स्टील प्लांट का इस प्रकार के निजीकरण के समाचार से समुचे प्रदेश के साथ-साथ बस्तरवासियों को गहरा धक्का लगा है। भारत सरकार के इस प्रकार फैसले से आदिवासी समुदाय आंदोलित हो रहें है तथा इनके मध्य शासन-प्रशासन के विरूद्व असंतोष की भावना व्याप्त हो रही है। आप इस बात से भली-भांति अवगत होंगे कि राज्य शासन, काफी अथक प्रयासों से नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगाने में सफल हुई है।

इन परिस्थितियों में नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण होने से नक्सलियों द्वारा आदिवासियों के असंतोष का अनुचित लाभ उठाने की संभावना से इंकार नही किया जा सकता। उन्होंने अवगत कराया कि नगरनार स्टील प्लांट के लिए लगभग 610 हेक्टेयर निजी जमीन अधिग्रहित की गई है, जो ’सार्वजनिक प्रयोजन’ के लिए ली गई है। इसके साथ ही नगरनार स्टील प्लांट में लगभग 211 हेक्टेयर सरकारी जमीन आज भी छत्तीसगढ़ शासन की है।

इसमें से केवल 27 हेक्टेयर जमीन 30 वर्षों के लिए सशर्त एनएमडीसी को दी गई है, बाकी पूरी शासकीय जमीन छत्तीसगढ़ शासन के स्वामित्व की है और राज्य शासन ने जो जमीन उद्योग विभाग को हस्तांतरित की है, उसकी पहली शर्त यही है कि उद्योग विभाग द्वारा भूमि का उपयोग केवल एनएमडीसी द्वारा स्टील प्लांट स्थापित किये जाने के प्रयोजन के लिए ही किया जायेगा।

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