छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ HC ने आज मीसा बंदी नागरिकों के पेंशन संबंधी याचिका स्वीकृत

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने आज एक महत्वपूर्ण फैसले में मीसा बंदी नागरिकों के पेंशन संबंधी याचिका स्वीकृत कर ली ।

भरत मंगवानी

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने आज एक महत्वपूर्ण फैसले में मीसा बंदी नागरिकों के पेंशन संबंधी याचिका स्वीकृत कर ली।

विदित हो कि आपातकाल के दौरान मीसा अधिनियम के अंतर्गत 25/06/1975 से 31/03/1977 तक कि अवधि में मीसा अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत जेल में बंद नागरिकों को सम्मान निधि प्रदान किया जा रहा था। जिसे वर्तमान सरकार के द्वारा अचानक ही बंद कर दिया गया था, जिसे बिलासपुर निवासी जानकी गुलाबानी, रामाधार चंद्रा सहित अन्य के द्वारा उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी थी। और अंततः यह याचिका इस महत्वपूर्ण फैसले से स्वीकृत हुई।

लोकनायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि नियम 2008

ज्ञात हो कि पूर्ववर्ती सरकार के द्वारा लोकनायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि नियम 2008 के तहत मीसाबंदियों को उनके जेल की अवधि के अनुसार पैंशन दिया जा रहा था.. जिसे सरकार बदलने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश दिनांक 28/01/2019 से अचानक बंद कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने उक्त आदेश को न्यायालय में चुनौती दे कर इसे लागू किये जाने की याचना की थी, इस दौरान सरकार ने इस नियम को जनवरी 2020 से अधिसूचना जारी कर निरसित कर दिया था जिससे उक्त दिनांक से पेंशन की पात्रता खत्म हो गई थी।

न्यायालय ने अपने इस महत्वपूर्ण फैसले में माना कि विगत एक दशक तक जिस पेंशन का लाभ याचिकाकर्ताओं को प्राप्त हुआ उसे अचानक बिना इनकी गलती से बंद किया जाना अन्यायपूर्ण था। साथ ही साथ सरकार ने किसी भी समय तात्विक समाधान इस बाबत का के वाक़ई में कोई भी याचिकाकर्ता इस योजना के अंतर्गत पेंशन की पात्रता रखता है य्या नही कभी भी नही किया।

सरकार का यह निर्णय त्रुटिपूर्ण था क्योंकि इसके पूर्व प्राकृतिक न्याय के नियमो का पालन अथवा ध्यान नहीं दिया गया।

विभिन्न नजीरों का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति पी सैम कोशी की माननीय न्यायालय ने याचिका स्वीकृत की और अपने फैसले में स्पष्ट किया कि समस्त याचिका में पेनाइन की पात्रता आदेश दिए जाने से लेकर निरसन अधिसूचना की तारीख तक बनती है।

यह फैसला आने वाले समय मे मील का पत्थर साबित होगा।

याचिका में भारत गुलाबानी,ग़ालिब द्विवेदी और अमियकान्त तिवारी अधिवक्ता ने पैरवी की।

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